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प्रभावी जल प्रबंधन के लिए जनभागीदारी अनिवार्य: राष्ट्रपति

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OM Darpan

Nov 19, 2025 12:11 am 252 views
प्रभावी जल प्रबंधन के लिए जनभागीदारी अनिवार्य: राष्ट्रपति

 
  • छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार वितरित

  • ‘जल संचय-जन भागीदारी’ के तहत 35 लाख से अधिक स्ट्रक्चर तैयार

नई दिल्ली.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार (18 नवंबर, 2025) को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार और जल संचय-जन भागीदारी पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि जल सुरक्षा और प्रबंधन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए व्यक्तियों, परिवारों और समाज की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।

राष्ट्रपति ने गिरते भूजल स्तर और जलवायु परिवर्तन के खतरों की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारत में जल का कुशल उपयोग एक वैश्विक अनिवार्यता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की विशाल जनसंख्या की तुलना में हमारे पास सीमित जल संसाधन हैं, इसलिए प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

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समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने भारतीय संस्कृति में जल के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय गीत में बंकिम चंद्र चटर्जी ने 'सुजलम्' शब्द का प्रयोग किया है, जिसका अर्थ है प्रचुर जल संसाधनों से धन्य होना। हमारी सभ्यता नदी घाटियों और जल स्रोतों के इर्द-गिर्द ही विकसित हुई है।" उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय जल सहित सभी प्राकृतिक संसाधनों का गहरा सम्मान करते हैं, और यह भावना हर नागरिक की जीवनशैली का हिस्सा होनी चाहिए।

35 लाख नए जल संरचनाओं का निर्माण

जल संरक्षण की दिशा में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि पिछले वर्ष शुरू की गई 'जल संचय-जन भागीदारी' पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस अभियान के तहत अब तक 35 लाख से अधिक भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जो जल सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है।

इंडस्ट्री अपनाए 'शून्य द्रव उत्सर्जन' का लक्ष्य

राष्ट्रपति ने औद्योगिक क्षेत्र और अन्य हितधारकों को 'चक्रीय जल अर्थव्यवस्था' (Circular Water Economy) अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जल उपचार और रिसाइकिलिंग के जरिए कई उद्योगों ने 'शून्य द्रव उत्सर्जन' (Zero Liquid Discharge) का लक्ष्य हासिल किया है, जो अनुकरणीय है। साथ ही, किसानों और उद्यमियों से अपील की कि वे कम पानी में अधिकतम उत्पादन के नवोन्मेषी तरीके अपनाएं।

जागरूकता ही बचाव

राष्ट्रपति मुर्मू ने चेतावनी देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन सीधे तौर पर जल चक्र को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में विवेकशील नागरिकों को 'जल-समृद्धि मूल्य श्रृंखला' में हिस्सेदार बनना होगा। उन्होंने कहा, "जल का उपयोग करते समय हमें याद रखना चाहिए कि हम एक अत्यंत मूल्यवान संपत्ति खर्च कर रहे हैं।"

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