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छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा पर उठे सवाल: पत्रकारों ने की सुरक्षा कानून लागू करने की मांग

छत्तीसगढ़ पत्रकार सुरक्षा कानून

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रायपुर।

छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बावजूद पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। पहले कांग्रेस की सरकार थी, अब भाजपा की सरकार है, लेकिन पत्रकारों की सुरक्षा के मुद्दे पर स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। पत्रकारों पर हमले लगातार जारी हैं, और उन्हें फर्जी मामलों में फंसाकर जेल भेजने की साजिशें की जा रही हैं। इन्हीं मुद्दों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए संयुक्त पत्रकार महासभा द्वारा राजधानी रायपुर के ग्रास मेमोरियल में “पत्रकार संकल्प दिवस” का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के 30 से अधिक पत्रकार संगठनों के पत्रकार शामिल हुए। मंच पर उपस्थित वरिष्ठ पत्रकारों ने प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की और राज्य सरकार से तत्काल पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने पत्रकारों के लिए शासन की ओर से विभिन्न सुविधाओं की मांग भी रखी।

कार्यक्रम के दौरान कई पीड़ित पत्रकारों ने पूर्व और वर्तमान सरकार में हुए शोषण और उत्पीड़न की घटनाएं साझा कीं। उन्होंने अपनी समस्याएं प्रदेश के अन्य पत्रकारों के समक्ष रखते हुए न्याय की गुहार लगाई। कार्यक्रम के बाद प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ सरकार से पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग को लेकर राजभवन की ओर रुख किया और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। पीड़ित पत्रकारों ने भी सामूहिक रूप से ज्ञापन सौंपते हुए अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की।

एकजुटता का प्रदर्शन

यह आयोजन छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार ऐसा कार्यक्रम बना, जिसमें राज्य के विभिन्न पत्रकार संगठनों के पत्रकार एकजुट होकर मंच पर आए। सभी पत्रकारों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए सरकार तक अपनी बात पहुंचाई और न्याय की मांग की।

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