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उद्यानिकी विभाग की मदद से किसान एतवार साय पैकरा ने 0.400 हेक्टेयर में किया बंपर उत्पादन, शुद्ध लाभ ने चौंकाया
✍️ डिजिटल डेस्क
रायगढ़ | छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में खेती-किसानी की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने आधुनिक तकनीक की ताकत को साबित कर दिया है। लैलूंगा विकासखंड के ग्राम झारआमा के किसान एतवार साय पैकरा ने कभी अनुपयोगी और बंजर मानी जाने वाली जमीन पर ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की खेती कर सफलता की नई कहानी लिखी है। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और नई तकनीक के समन्वय से उन्होंने न केवल 187 क्विंटल का बंपर उत्पादन हासिल किया, बल्कि कुल 4.25 लाख की शानदार आमदनी भी अर्जित की है।
पहाड़ जैसी चुनौतियों के बीच तकनीक ने दिखाया रास्ता
एतवार साय पैकरा की जमीन गांव से दूर जंगल के पास स्थित थी, जहां सिंचाई की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण खेती करना एक बड़ी चुनौती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए उद्यानिकी विभाग की सलाह पर उन्होंने सबसे पहले भूमि का समतलीकरण कराया। सिंचाई की बाधा दूर करने के लिए ड्रिप तकनीक और मल्चिंग पद्धति को अपनाया गया। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत वर्ष 2025-26 में उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्राफ्टेड सब्जियों की बुआई की, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक रोग-प्रतिरोधी और मजबूत साबित हुईं।
मुनाफे का शानदार गणित: लागत कम, मुनाफा दोगुना
किसान की मेहनत का नतीजा आंकड़ों में साफ नजर आता है। उन्होंने टमाटर की फसल से 87 क्विंटल उत्पादन कर 1 लाख 75 हजार रुपये की बिक्री की। वहीं, बैंगन की फसल ने 100 क्विंटल उत्पादन के साथ 2 लाख 50 हजार रुपये की कमाई कराई। कुल 187 क्विंटल उत्पादन से उन्हें 4 लाख 25 हजार रुपये प्राप्त हुए। इस पूरी प्रक्रिया में 1 लाख 45 हजार रुपये की लागत आई, जिसे काटकर किसान को 2 लाख 80 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है।
अभी और बढ़ेगी आय, ग्रामीणों के लिए बने मिसाल
खास बात यह है कि ग्राफ्टेड बैंगन की फसल से उत्पादन अभी भी जारी है। आने वाले समय में इससे 150 से 200 क्विंटल अतिरिक्त उत्पादन की संभावना जताई जा रही है, जिससे 4 से 5 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। ग्राफ्टेड पौधों की यह खासियत है कि इनका नीचे का हिस्सा (रूटस्टॉक) जंगली बैंगन और ऊपरी हिस्सा (सायन) टमाटर या हाइब्रिड बैंगन होता है, जो इन्हें भारी बारिश, सूखा और जलभराव जैसी प्रतिकूल स्थितियों में भी सुरक्षित रखता है। एतवार साय पैकरा की इस सफलता को देख अब गांव के अन्य किसान भी आधुनिक खेती की ओर रुख करने लगे हैं।








