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राखड़ के निपटान में लापरवाही; सुरक्षा के लिए खतरा और फसलों पर मंडराया खतरा।
धरसीवा (सत्यानंद सोई)
रायपुर-बिलासपुर हाईवे पर सांकरा से सिमगा के बीच एनएचएआई की जमीन पर अवैध रूप से औद्योगिक राखड़ डंप की जा रही है, जो कई गंभीर समस्याएं खड़ी कर रही है। हाईवे के लंबे भूभाग पर सैंकड़ों डंफरों द्वारा यह डंपिंग की जा रही है, जबकि इसकी अनुमति के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस गतिविधि ने न केवल एनएचएआई की बेशकीमती जमीन पर कब्जे की साजिश की आशंका को बढ़ा दिया है, बल्कि स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल दिया है।
राखड़ उड़े तो हादसे की आशंका:
राखड़ का निपटान सही ढंग से न होने के कारण यह सिक्स लाइन के ऊपर भी बिखर रही है। वाहनों के चलते समय हवा के साथ उड़कर यह राखड़ दुपहिया चालकों की आँखों में चुभ रही है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है।
कृषि पर असर:
केमिकल युक्त राखड़ के डंपिंग से आसपास के नाले भी लाल हो गए हैं। यदि यह दूषित पानी खेतों में प्रवाहित होता है, तो धान की फसलों के बर्बाद होने का खतरा है। इस अनदेखी से कृषि कार्य पर भी भारी असर पड़ सकता है।
निर्माण एजेंसी की दुश्वारियाँ:
पुंज लॉयड, जो कि हाइवे निर्माण का काम देख रही है, को भी इससे भारी परेशानी हो रही है। उनके कर्मचारियों को लगातार सिक्स लाइन की सफाई करनी पड़ रही है। हवा में उड़ती राखड़ से कोई बड़ी दुर्घटना न हो, इसके लिए विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है।
कंपनी की भूमिका:
सूत्रों के अनुसार, यह राखड़ सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र की एक प्रमुख फैक्ट्री से आती है। ऐसा प्रतीत होता है कि न सिर्फ राखड़ फेंकी जा रही है, बल्कि इसका उद्देश्य एनएचएआई की जमीन को कब्जाने का भी हो सकता है, जिससे भूमि का स्तर सिक्स लाइन के बराबर हो सके।
अधिकारी का रुख:
इस संबंध में इस प्रतिनिधि ने जब एनएचएआई के अधिकारी आईईएस प्रवीण जी को काल कर पूरी बात बताई और उनका इस मामले में पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने काल कट कर दिया इसके बाद पुनः उन्होंने काल रिसीव नहीं किया











