14 सितम्बर 2026 |
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छत्तीसगढ़ बनेगा देश की ऊर्जा राजधानी: 3.4 लाख करोड़ के निवेश का मार्ग प्रशस्त, ऊर्जा सचिव डॉ. रोहित यादव ने साझा किया मास्टरप्लान

OM Darpan

Feb 20, 2026 02:49 am 286 views
छत्तीसगढ़ बनेगा देश की ऊर्जा राजधानी: 3.4 लाख करोड़ के निवेश का मार्ग प्रशस्त, ऊर्जा सचिव डॉ. रोहित यादव ने साझा किया मास्टरप्लान

रायपुर।

छत्तीसगढ़ को देश की ऊर्जा राजधानी बनाने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है। प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन, पारेषण और वितरण के क्षेत्र में व्यापक कार्ययोजना पर काम चल रहा है। यह बात ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने गुरुवार को नया रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही। उन्होंने विभाग की उपलब्धियों और आगामी 3 वर्षों की कार्ययोजना का विस्तृत ब्यौरा पेश किया।

30 हजार मेगावाट के पार पहुंची प्रदेश की विद्युत क्षमता

डॉ. यादव ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी, एनटीपीसी और निजी उत्पादकों को मिलाकर प्रदेश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 30,671.7 मेगावाट हो गई है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी ताप विद्युत (28,824 मेगावाट) की है। इसके अलावा 220 मेगावाट जल विद्युत और सोलर व बायोमास से 2,047 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। ताप विद्युत में स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी का योगदान 2,840 मेगावाट, एनटीपीसी व निजी बिजलीघरों का 20,299 मेगावाट और कैप्टिव पॉवर प्लांट्स का 5,266 मेगावाट है।

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32 हजार मेगावाट के नए प्रोजेक्ट्स, 3.4 लाख करोड़ का आएगा निवेश

ऊर्जा सचिव ने एक बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 32,100 मेगावाट क्षमता की नई परियोजनाओं के लिए विभिन्न संस्थाओं के साथ एमओयू किए गए हैं। इससे प्रदेश में लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इन नई परियोजनाओं में शामिल हैं:

  • 12,100 मेगावाट ताप विद्युत

  • 4,200 मेगावाट न्यूक्लियर ऊर्जा

  • 2,500 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर

  • 13,300 मेगावाट पंप स्टोरेज

नेट जीरो कार्बन का लक्ष्य और नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर

भारत सरकार के वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य के तहत छत्तीसगढ़ में भी कार्बन उत्सर्जन घटाने पर फोकस है। डॉ. यादव ने बताया कि पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाओं के लिए नीति 2023 लागू की गई है। स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी ने 8,300 मेगावाट क्षमता के 6 स्थलों की पहचान की है, जिनमें से 5 की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार है। निजी क्षेत्र में भी 5,000 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं पर काम जारी है।

साथ ही, एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड व राज्य उत्पादन कंपनी के संयुक्त उपक्रम से 2,000 मेगावाट के प्रोजेक्ट विकसित किए जा रहे हैं। इनमें अटल बिहारी ताप विद्युत गृह के जलाशय में 6 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर और कोरबा पूर्व के बंद राखड़ बांध पर 32 मेगावाट का सौर संयंत्र व 500 मेगावाट-ऑवर बैटरी स्टोरेज सिस्टम प्रस्तावित है।

उत्पादन, पारेषण और वितरण में तकनीकी विस्तार

  • उत्पादन: कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों और मड़वा में 800 मेगावाट की इकाई पर काम प्रगति पर है।

  • पारेषण: दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच उपकेन्द्रों की संख्या 132 से बढ़कर 137 हो गई है। 132 केवी लाइनों में पुराने कंडक्टरों को बदलकर हाई-टेक एचटीएलएस कंडक्टर लगाए जा रहे हैं। 5,200 किमी ऑप्टिकल फाइबर बिछाकर 131 उपकेन्द्रों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा गया है।

  • वितरण: प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या 65 लाख के पार हो गई है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंची बिजली

जनहितकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए सचिव ने बताया कि 'नियद नेल्ला नार योजना' के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के सैकड़ों गांवों में विद्युतीकरण किया गया है। इसके अलावा पीएम सूर्यघर योजना, पीएम कुसुम, डॉ. खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना और बीपीएल मुफ्त बिजली योजना से लाखों परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।

क्रेडा (CREDA) की उपलब्धियों पर उन्होंने बताया कि बीते दो वर्षों में 26,794 सोलर सिंचाई पंप, 7,833 सोलर पेयजल पंप और 1,709 सोलर हाईमास्ट लगाए गए हैं।

प्रेस वार्ता के दौरान सीएसपीडीसीएल के एमडी भीम सिंह कंवर, सीएसपीजीसीएल के एमडी एस के कटियार, सीएसपीटीसीएल के एमडी राजेश कुमार शुक्ला सहित ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण भी मौजूद रहे।

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