कबीरधाम।
ग्रामीण परिवेश में यदि सही मार्गदर्शन और इच्छाशक्ति हो, तो सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। कबीरधाम जिले के ग्राम सेमो की लता साहू ने इसे साबित कर दिखाया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ‘बिहान योजना’ से जुड़कर लता साहू ने न केवल अपनी गरीबी को मात दी, बल्कि आज वे पूरे जिले के लिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। उनकी इस कड़ी मेहनत और सफलता के लिए उन्हें आगामी 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान न केवल लता साहू के लिए, बल्कि पूरे कबीरधाम जिले के लिए गौरव का विषय है।
आत्मविश्वास से भरा सफर: तंगी से समृद्धि की ओर
लता साहू की सफलता की कहानी संघर्षों से शुरू होती है। कुछ समय पहले तक उनकी आर्थिक स्थिति सामान्य थी और सीमित आय के चलते परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करना भी एक चुनौती थी। ऐसे कठिन समय में उन्होंने ‘बिहान योजना’ के अंतर्गत संचालित महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। यह फैसला उनके जीवन का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ।
समूह से जुड़ने के बाद लता साहू ने सबसे पहले बचत करना सीखा। इसके बाद, उन्होंने समूह के माध्यम से आजीविका ऋण प्राप्त किया। इस राशि का सदुपयोग करते हुए उन्होंने टेंट और कैटरिंग का व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत छोटे स्तर पर हुई, लेकिन लता साहू की निरंतर मेहनत, समय पर कार्य और गुणवत्ता के कारण उनका व्यवसाय चल निकला।
लखपति दीदी बनकर पेश की नजीर
धीरे-धीरे टेंट और कैटरिंग का काम उनकी आय का स्थायी और मजबूत जरिया बन गया। मासिक और वार्षिक आय में हुई उल्लेखनीय वृद्धि ने उन्हें आज “लखपति दीदी” की पहचान दी है। आज वे न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हैं, बल्कि पूरे आत्मसम्मान के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं।
अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
लता साहू की यह उपलब्धि अब उनके गाँव और जिले की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उन्हें आदर्श मानकर कई महिलाएं स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। अपनी सफलता पर लता साहू कहती हैं, “बिहान योजना ने मुझे आत्मविश्वास दिया है। समूह की ताकत और सही मार्गदर्शन के कारण ही मैं आज अपने पैरों पर खड़ी हूं।”
गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में होने वाला उनका सम्मान, जमीनी स्तर पर बिहान योजना द्वारा लाए जा रहे सकारात्मक बदलावों की गवाही देता है।







