सुकमा (कौशल संदुजा)।
जिला सुकमा में नक्सली संगठन से जुड़े तीन सक्रिय नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ शासन की “छत्तीसगढ़ नक्सलवाद उन्मूलन एवं पुनर्वास नीति” और “नियद नेल्ला नार” योजना से प्रभावित होकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आत्मसमर्पण कर दिया।
अंदरूनी क्षेत्रों में लगातार स्थापित हो रहे सुरक्षा कैंप और पुलिस के बढ़ते प्रभाव से तंग आकर माओवादियों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में मड़कम जोगा, माड़वी हिड़मा और अवलम देवा शामिल हैं। इन नक्सलियों ने बिना हथियार के आत्मसमर्पण किया।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पहचान
- मड़कम जोगा (मेट्टागुड़ा आरपीसी जनताना सरकार अध्यक्ष)
उम्र: 37 वर्ष, जाति: मुरिया, निवासी: मरकनगुड़ा बड़ापारा, थाना पामेड़, जिला बीजापुर। - माड़वी हिड़मा (दुलेड़ आरपीसी मिलिशिया इंचीफ)
उम्र: 27 वर्ष, जाति: मुरिया, निवासी: ताड़मेटला स्कूलपारा, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा। - अवलम उर्फ सलवम देवा (जोनागुड़ा आरपीसी सीएनएम उपाध्यक्ष)
उम्र: 35 वर्ष, जाति: मुरिया, निवासी: जोनागुड़ा, थाना जगरगुंडा, जिला सुकमा।
पुलिस अधिकारियों की अहम भूमिका
आत्मसमर्पण कराने में 02 री वाहिनी सीआरपीएफ, नक्सल सेल और विशेष आसूचना शाखा सुकमा के कार्मिकों की विशेष भूमिका रही।
- मड़कम जोगा को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने में 02 री वाहिनी सीआरपीएफ की अहम भूमिका रही।
- माड़वी हिड़मा को आत्मसमर्पण के लिए नक्सल सेल टीम ने प्रेरित किया।
- अवलम देवा को आत्मसमर्पण के लिए विशेष आसूचना शाखा सुकमा के कार्मिकों ने प्रोत्साहित किया।
छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति का असर
छत्तीसगढ़ शासन की “नक्सलवाद उन्मूलन एवं पुनर्वास नीति” के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों को प्रोत्साहन राशि और पुनर्वास के लिए सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
आत्मसमर्पण की यह प्रक्रिया पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। अंदरूनी क्षेत्रों में पुलिस की उपस्थिति और लगातार बढ़ते कैंप के चलते नक्सलियों के मनोबल पर असर पड़ा है।
नक्सलियों ने क्यों किया आत्मसमर्पण?
नक्सलियों ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि वे संगठन की अमानवीय विचारधारा, शोषण, अत्याचार और बाहरी नक्सलियों द्वारा स्थानीय आदिवासियों के साथ किए जा रहे भेदभाव और हिंसा से परेशान होकर आत्मसमर्पण करने को मजबूर हुए।







