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राधेश्री वायर फैक्ट्री में सुरक्षा की अनदेखी से श्रमिक की मौत, दो बच्चियां अनाथ

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धरसीवा (सत्यानंद सोई)।

औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी और प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण होने वाले हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला उरला के बोरझरा स्थित राधेश्री वायर फैक्ट्री से सामने आया है, जहां बिना किसी सुरक्षा उपकरण के ऊंचाई पर काम कर रहे एक श्रमिक की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने फैक्ट्री प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और दो मासूम बच्चियों के सिर से पिता का साया छीन लिया है।

सुरक्षा उपकरणों के बिना काम, गिरी जान

जानकारी के मुताबिक, राधेश्री वायर फैक्ट्री में कार्यरत रघुवीर सिंह परिहार नामक श्रमिक को गत 9 सितंबर को बिना हेलमेट या किसी अन्य सुरक्षा उपकरण के लगभग तीस से चालीस फीट की ऊंचाई पर शेड का काम करने के लिए चढ़ा दिया गया था। जैसे ही उन्होंने ऊंचाई पर काम करना शुरू किया, अचानक नीचे गिर गए। ऊंचाई से गिरने के बाद रघुवीर सिंह को मरणासन्न अवस्था में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उनके ससुर राजाराम परिहार ने बताया कि यदि उनके दामाद को हेलमेट, फेसहेड, हैंडग्लॉब्ज आदि सुरक्षा उपकरणों के साथ काम कराया जाता, तो आज वह जीवित होते। गिरने से रघुवीर सिंह के सिर, पीठ और सीने सहित शरीर में गंभीर चोटें आई थीं।

 इलाज का खर्च रोका, फिर मौत

शुरुआत में फैक्ट्री प्रबंधन ने रघुवीर सिंह के इलाज का खर्च उठाया, लेकिन कुछ दिनों बाद ही उन्होंने इलाज का खर्च देना बंद कर दिया। इसके बाद रघुवीर सिंह ने दम तोड़ दिया। यह घटना प्रबंधन की संवेदनहीनता को दर्शाती है और उनकी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाती है।

 दो मासूम बच्चियों का भविष्य दांव पर

मृतक रघुवीर सिंह की प्रबंधन की लापरवाही से हुई मौत के कारण उनकी दो मासूम बेटियां – आदया परिहार (10 वर्ष) और अजीता सिंह (7 वर्ष) – अनाथ हो गई हैं। मृतक के बड़े भाई दिलीप परिहार ने बताया कि घर में कमाने वाले रघुवीर सिंह ही थे, और उनके चले जाने से बच्चियों के भविष्य को लेकर गहरी चिंता उत्पन्न हो गई है। यह घटना परिवार पर वज्रपात के समान है।

प्रबंधन सवालों के घेरे में, जिम्मेदारी से पीछे हट रहा

घोर लापरवाही के बावजूद, घटना के बाद फैक्ट्री प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहा है। जब इस मामले में हमारे प्रतिनिधि ने फैक्ट्री के जीएम से बात करने की कोशिश की, तो वे भाग खड़े हुए। प्रबंधन का यह रवैया उनकी लापरवाही को और अधिक उजागर करता है और कानूनी कार्रवाई की मांग को बल देता है।

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