- दुर्ग जिले में मनरेगा के तहत ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए रोजगार दिवस आयोजित
दुर्ग (लोकेश्वर सिंह ठाकुर)।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत दुर्ग जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में रोजगार दिवस का आयोजन किया गया। यह आयोजन कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देशन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे के मार्गदर्शन में नियमित रूप से हर माह किया जा रहा है।
इस विशेष दिन का उद्देश्य ग्रामीणों, विशेषकर जॉब कार्डधारी परिवारों को मनरेगा की योजनाओं, नियमों और उनके अधिकारों की जानकारी देकर उन्हें जागरूक और सशक्त बनाना है।
डिजिटल प्रक्रियाओं की दी गई जानकारी
कार्यक्रम में मनरेगा के अंतर्गत श्रमिकों को आधार आधारित भुगतान, एनएमएमएस ऐप, ई-एम.बी ऐप मास्टर की एंट्री और अन्य डिजिटल प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई। ग्रामीणों को बताया गया कि ये माध्यम कैसे पारदर्शी और समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करते हैं।
जल संरक्षण और वृक्षारोपण को लेकर विशेष जागरूकता
रोजगार दिवस के अवसर पर “मोर गांव मोर पानी” अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण और वृक्षारोपण पर विशेष बल दिया गया। ग्रामीणों को वर्षा जल संग्रहण, रिचार्ज पिट, सोक पिट, डबरी, कच्ची-पक्की नाली और कुआं निर्माण जैसी जल संचयन तकनीकों की जानकारी दी गई।
साथ ही, “एक पेड़ मां के नाम 2.0” अभियान के तहत हर व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का संदेश दिया गया।
महिलाओं और किसानों को दी गई विशेष जानकारी
इस कार्यक्रम में महिलाओं को मातृत्व भत्ता, गोदी योजना, श्रम कार्ड, आधार मैपिंग जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही मनरेगा की नई मजदूरी दर ₹261 (जो अप्रैल 2025 से लागू है), जॉब कार्ड में नाम जोड़ने, लंबित भुगतान, आवेदन प्रक्रिया, और आवास योजना के अंतर्गत 90 दिवस की मजदूरी भुगतान जैसे विषयों पर भी विस्तृत जानकारी साझा की गई।
ग्राम पंचायतों में सफल आयोजन
रोजगार दिवस का आयोजन जनपद पंचायत दुर्ग की ग्राम पंचायतों – ढाबा, नगपुरा, मतवारी, ननकट्टी, खपरी (कु.), उमरकोटी, पउवारा और अंजोरा (ख) में किया गया।
इसी तरह, जनपद पंचायत पाटन के सांतरा, कोटना, तरवाए, अकतई, तर्रा, टेमरी, ओदोगहन और जनपद पंचायत धमधा के पथरिया (स), चेटुआ, बिरोदा ग्राम पंचायतों में भी रोजगार दिवस सफलतापूर्वक मनाया गया।
समस्याएं सुनी गईं, मौके पर हुए समाधान
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों की समस्याएं मौके पर ही सुनी गईं और संबंधित अधिकारियों द्वारा समाधान भी किया गया। ग्रामीणों को योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया और उन्हें बताया गया कि कैसे वे खुद जागरूक रहकर इन योजनाओं में सक्रिय भागीदारी निभा सकते हैं।






