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महिला सशक्तिकरण से बदलेगी गांवों की तकदीर, डिप्टी सीएम ने दिए निर्देश

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रायपुर।

छत्तीसगढ़ की ग्रामीण तस्वीर को संवारने और अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मंत्रालय महानदी भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की मैराथन समीक्षा बैठक की। दो दिनों तक चली इस बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। बैठक में प्रमुख सचिव पंचायत निहारिका बारीक सिंह, सचिव भीम सिंह, संयुक्त सचिव धर्मेश कुमार साहू सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़:

उपमुख्यमंत्री शर्मा ने बैठक की शुरुआत में कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ गांव के मेहनतकश लोग और महिलाएं हैं। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि ग्रामीण परिवार सिर्फ योजनाओं के आंकड़ों में नहीं, बल्कि अपने जीवन स्तर में भी वास्तविक बदलाव महसूस करें। उन्होंने विशेष तौर पर महिलाओं और वंचित वर्गों को स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका से जोड़ने के निर्देश दिए। इन समूहों को खेती, जैविक उत्पादन, मशरूम उत्पादन, वनोपजों के संग्रहण व प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर महिला समूहों के उत्पादों को बाज़ार तक पहुंचाया जा रहा है, जिसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बिक्री के लिए प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने आत्मसमर्पित नक्सलियों को भी समूहों से जोड़कर आयमूलक कार्यों से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि आईआईटी भिलाई और तकनीकी संस्थानों से सहयोग लेकर महुआ, साल बीज, चिरौंजी, आंवला, लाह, हर्रा-बहेड़ा जैसे वनोपजों के प्रसंस्करण और विपणन की आधुनिक इकाइयां जिले स्तर पर स्थापित की जाएंगी। इससे न केवल रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि युवाओं को भी गांव में ही स्वरोजगार के साधन मिलेंगे।

सड़कें बनेंगी मजबूत, लापरवाहों पर होगी कार्रवाई:

उपमुख्यमंत्री शर्मा ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ समयसीमा में पूरे हों, इसके लिए ठेकेदारों की जवाबदेही तय हो और लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की जाए। गुणवत्ता और समयसीमा से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ निर्माण कार्य समय पर और गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया।

जल संरक्षण में मिसाल:

बैठक में भू-जल संरक्षण और संवर्धन के लिए चलाए जा रहे ‘मोरे गांव मोरे पानी’ महाभियान की भी समीक्षा की गई। उपमुख्यमंत्री ने अब तक निर्मित 37,090 जल संरचनाओं की सराहना की, जिनमें तालाब गहराईकरण, डबरी, चेक डैम, रिचार्ज शाफ्ट और परकोलेशन टैंक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जनभागीदारी और सामुदायिक श्रमदान से 3.32 लाख से अधिक कार्य पूरे किए गए हैं, जो गांवों की जल आत्मनिर्भरता का प्रमाण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जुलाई से अक्टूबर तक जल संरक्षण अभियान तेज किया जाए और इसके साथ ही वृक्षारोपण, जल स्रोतों की सफाई और अमृत सरोवरों के निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।

हर घर को मिलेगा अपना आवास:

उपमुख्यमंत्री शर्मा ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी स्वीकृत आवासों को समयबद्ध रूप से पूर्ण कराया जाए। बैठक में वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति और लंबित मामलों के तत्काल निराकरण के निर्देश दिए गए। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना ग्रामीण जनता को गरिमामय जीवन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है और इसे सुचारु रूप से क्रियान्वित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता, पारदर्शिता और पात्र हितग्राहियों को प्राथमिकता दिए जाने पर बल दिया। उन्होंने निर्देशित किया कि जिन जिलों में अपेक्षित गति नहीं है, उसका मॉनिटरिंग राज्य स्तर से करें ताकि योजना के लाभार्थियों को शीघ्र आवास की सुविधा मिल सके। बैठक में बताया गया कि पीएम जन मन योजना के तहत 33,000 से अधिक आवासों को मंजूरी मिली है, जिनमें से 10,500 बन चुके हैं।

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