रायपुर।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत आमानाका ब्रिज के नीचे स्थित फुटकर व्यापारियों को हटाने के लिए छह महीने पहले नगर निगम द्वारा नोटिस जारी किया गया था। इसके विरोध में व्यापारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट से स्टे ऑर्डर प्राप्त किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि व्यापारियों का पुनर्वास सभी आवश्यक सुविधाओं के साथ किया जाए।
नगर निगम की कार्रवाई
शुक्रवार को नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने पुलिस बल, क्रेन और ट्रक की मदद से व्यापारियों को जबरन हटाने की कोशिश की। अधिकारियों ने हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी करते हुए कार्रवाई को अंजाम दिया। व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया और उनके पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं की गई।

व्यापारियों का विरोध
स्थानीय व्यापारियों ने इस कार्रवाई के खिलाफ कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की यह कार्रवाई अमानवीय है और उन्हें उनकी आजीविका से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है। व्यापारियों ने नगर निगम को कोर्ट का आदेश भी दिखाया, जिसमें पुनर्वास की स्पष्ट व्यवस्था करने को कहा गया था।
एक व्यापारी ने बताया, “हमारा व्यवसाय ही हमारी आजीविका का साधन है। बिना पुनर्वास के हमें हटाना अन्याय है। हम दोबारा कोर्ट जाएंगे यदि प्रशासन ने अपनी मनमानी जारी रखी।”
हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि फुटकर व्यापारियों को सभी सुविधाओं के साथ व्यवस्थित रूप से पुनर्वासित किया जाए। लेकिन, नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अधिकारियों ने आदेश की अवहेलना करते हुए व्यापारियों को हटाने की कोशिश की।



मामले का असर
इस घटना ने स्थानीय व्यापारियों और प्रशासन के बीच तनाव को बढ़ा दिया है। व्यापारियों का कहना है कि यह गरीब तबके के लोगों के साथ अन्याय है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने अपनी कार्रवाई जारी रखी तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे और कोर्ट की शरण में भी जाएंगे।
व्यापारियों की मांग
व्यापारियों की मांग सिर्फ इतनी है कि उन्हें तुरंत पुनर्वास की सुविधा दी जाए। उन्होंने कहा कि जब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, उन्हें उनके व्यवसाय स्थल से हटाया न जाए। व्यापारियों ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है।
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