छत्तीसगढ़ के किसानों की पीड़ा
दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।
“खरीफ की बुवाई का समय है और खाद-बीज नहीं मिल रहा। गरीब और सीमांत किसान रोज सेवा सहकारी समिति के चक्कर काट रहे हैं,” — यह कहना है जनपद सदस्य किशोरी लाल देशमुख का।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में इस खरीफ सीजन की शुरुआत से ही किसान खाद और बीज की भारी कमी से जूझ रहे हैं। किसानों की इस गंभीर समस्या पर चिंता जताते हुए जनपद सदस्य किशोरी लाल देशमुख ने राज्य सरकार पर किसानों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है।
डीलर के पास है, समितियों में नहीं
देशमुख ने स्पष्ट किया कि खाद और बीज डीलरों के पास तो उपलब्ध है, लेकिन सेवा सहकारी समितियों में इन आवश्यक कृषि संसाधनों की भारी किल्लत बनी हुई है। इसका सीधा असर गरीब और सीमांत किसानों पर पड़ रहा है, जो इन समितियों के भरोसे बुवाई की तैयारी कर रहे थे।
किसानों को निराश कर रही समितियां
“सहकारी समितियों का गठन किसानों की सुविधा के लिए किया गया था, लेकिन जब वही संस्थाएं उन्हें निराश कर रही हैं, तो यह सरकार की विफलता है,” — देशमुख का दो टूक बयान।
उन्होंने कहा कि सरकार भले ही यह दावा कर रही हो कि खाद-बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। समितियों के बाहर लंबी कतारें और खाली हाथ लौटते किसान इसका प्रमाण हैं।
आंदोलन की चेतावनी
देशमुख ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही सेवा सहकारी समितियों में खाद और बीज की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो किसान हित में आंदोलन किया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि काला बाज़ारी पर सख्त कार्रवाई की जाए और हर पंचायत स्तर पर निगरानी समिति का गठन हो, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संसाधनों का सही वितरण हो।








