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स्वास्थ्य विभाग की जांच में मिलीं गंभीर खामियां
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स्टाफ की योग्यता और मेडिकल उपकरणों में मिली गड़बड़ी
रायपुर.
छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की सुरक्षा और उपचार मानकों में गंभीर अनियमितताओं को लेकर बलौदाबाजार जिले के दो निजी अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने आरोग्यम हॉस्पिटल, सिमगा और ओमकार हॉस्पिटल, बलौदाबाजार का आयुष्मान पंजीयन तत्काल प्रभाव से तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया है।
यह कार्रवाई मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। जांच में इन अस्पतालों के संचालन में कई गंभीर खामियां पाई गईं, जो न केवल नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रही थीं।
जांच में मिलीं मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दोनों अस्पतालों को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। अस्पतालों की ओर से प्राप्त जवाब को संतोषजनक नहीं पाया गया, जिसके बाद राज्य नोडल एजेंसी ने पंजीयन सस्पेंड करने की अनुशंसा को मंजूरी दे दी।
जांच में सामने आया कि अस्पतालों में न तो स्टाफ की योग्यता का विधिवत सत्यापन किया गया था और न ही आवश्यक मेडिकल उपकरण मौजूद थे।
जांच में सामने आईं ये प्रमुख खामियां:
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अस्पताल स्टाफ की योग्यता का सत्यापन नहीं होना।
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आवश्यक मेडिकल उपकरणों का अभाव।
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केस शीट और उपचार रजिस्टर में गंभीर गड़बड़ियां।
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आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली (Emergency Response System) का कमजोर होना।
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दवाइयों और उपचार प्रक्रियाओं की गलत प्रविष्टियां।
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मरीजों की देखरेख और आवश्यक सुविधाओं में भारी कमी।
तीन माह तक नहीं मिलेगा योजना का लाभ
पंजीयन निलंबन का अर्थ है कि अगले तीन महीनों तक इन दोनों अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का न तो नया पंजीकरण हो सकेगा और न ही उन्हें योजना के तहत इलाज का लाभ मिल पाएगा।
विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे इस अवधि में सभी खामियों को दुरुस्त करें, जिसमें प्रशिक्षित स्टाफ की नियुक्ति, उपकरणों की व्यवस्था और रिकॉर्ड का सही संधारण शामिल है।
सुधार नहीं होने पर होगी कड़ी कार्रवाई
विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि तीन माह में व्यवस्थाओं को नियमों के अनुरूप नहीं सुधारा गया, तो आगे पंजीकरण रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है। अधिकारियों ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई को राज्य के अन्य निजी अस्पतालों के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी माना जा रहा है।









