बालोद।
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता और आर्थिक बचत का सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरी है। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में इस योजना का असर जमीन पर दिखने लगा है। जिले के निवासी महेश कुमार साहू अब उन हजारों परिवारों की कतार में शामिल हो गए हैं, जो हर महीने आने वाले भारी-भरकम बिजली बिल के बोझ से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। सोलर प्लांट लगने के बाद उनके घर का मासिक बिजली बिल अब शून्य पर सिमट गया है, जिससे उन्हें हर साल हजारों रुपये की सीधी बचत हो रही है।
सालाना 60 हजार तक की बचत
महेश कुमार साहू ने करीब एक साल पहले इस योजना के तहत अपने घर की छत पर 5 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगवाया था। प्लांट लगने से पहले उनके घर का औसत बिजली बिल 2,500 से 5,000 रुपये प्रति माह तक पहुंच जाता था। इस भारी खर्च का असर परिवार के मासिक बजट पर पड़ता था। लेकिन अब स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल से उनका बिजली बिल पूरी तरह समाप्त हो गया है। महेश अब न केवल बिल से मुक्त हैं, बल्कि नियमित रूप से आर्थिक बचत भी कर रहे हैं।
फंसने के बजाय मिली 1.08 लाख की मदद
सोलर प्लांट की स्थापना में आने वाले भारी खर्च को लेकर महेश पहले चिंतित थे, लेकिन सरकारी अनुदान ने उनकी राह आसान कर दी। महेश ने बताया कि प्लांट लगाने के लिए उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की ओर से संयुक्त रूप से 1 लाख 8 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। इस भारी-भरकम आर्थिक सहायता की वजह से प्लांट की लागत काफी कम हो गई और बिना किसी अतिरिक्त बोझ के वे इस योजना का लाभ उठाने में सफल रहे। महेश ने अब अन्य नागरिकों से भी अपील की है कि वे इस योजना से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें और बिजली बिल से मुक्ति पाएं।
इनका क्या कहना है:
“पहले हर महीने बिजली बिल पर मुझे हजारों रुपये खर्च करने पड़ते थे, जिससे घर का बजट बिगड़ जाता था। सरकार से मिले 1.08 लाख रुपये के अनुदान की मदद से अब मेरा बिजली बिल पूरी तरह समाप्त हो गया है। यह योजना आम नागरिकों के लिए वरदान है और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का सबसे अच्छा अवसर है। मेरा लोगों से आग्रह है कि वे भी सोलर प्लांट लगवाएं और इस आर्थिक बोझ से मुक्ति पाएं।”









