बीजापुर।
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में पशुपालन अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर लाभ का जरिया बन रहा है। पशुधन विकास विभाग की कृत्रिम गर्भाधान योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। वैज्ञानिक तरीकों और उन्नत प्रजनन से बछियों की प्राप्ति सुनिश्चित की जा रही है। इससे न केवल दूध उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि डेयरी व्यवसाय और पशुपालकों की आजीविका में भी बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। एक स्वस्थ बछिया भविष्य की एक स्थायी दुधारू इकाई है, जो आने वाले वर्षों में पशुपालकों के लिए आय का मुख्य स्रोत बनती है।
मोबाइल वेटरिनरी यूनिट ने दी प्रेरणा
बीजापुर के वार्ड क्रमांक 11 निवासी सुरेश राजपूत खेती को अपनी मुख्य आजीविका मानते थे। उन्होंने बताया कि मोबाइल वेटरिनरी यूनिट (MVU) बीजापुर की टीम ने उन्हें पशुधन विकास विभाग की कृत्रिम गर्भाधान योजना और इसके दूरगामी फायदों के बारे में जानकारी दी। टीम की सलाह और तकनीकी जानकारी से प्रेरित होकर सुरेश ने अपने पशुधन में नस्ल सुधार की दिशा में कदम उठाने का फैसला किया।
1962 हेल्पलाइन पर सूचना और मिली सफलता
योजना की प्रक्रिया के तहत, जैसे ही सुरेश का पशु हीट में आया, उन्होंने तत्काल 1962 हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से मोबाइल वेटरिनरी यूनिट को सूचित किया। सूचना मिलते ही विभागीय टीम तुरंत उनके घर पहुंची और पशु का कृत्रिम गर्भाधान किया। इस सटीक तकनीकी हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप सुरेश के घर उन्नत नस्ल की एक स्वस्थ मादा बछिया ने जन्म लिया। इस उपलब्धि से उत्साहित सुरेश अब अपने अन्य पशुओं का भी कृत्रिम गर्भाधान करा रहे हैं और क्षेत्र के अन्य पशुपालकों को भी जागरूक कर रहे हैं।
आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती का मार्ग
सुरेश राजपूत का मानना है कि कृत्रिम गर्भाधान न केवल पशुओं की नस्ल सुधारता है, बल्कि भविष्य में दुग्ध उत्पादन में भी कई गुना बढ़ोतरी करता है। इससे पशुपालकों की आय में सीधे वृद्धि होगी और ग्रामीण परिवारों के लिए आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने समय पर मिली तकनीकी सहायता के लिए पशुधन विकास विभाग और मोबाइल वेटरिनरी यूनिट बीजापुर का आभार व्यक्त किया है। यह सफलता साबित करती है कि सही समय पर मिली सही जानकारी और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण अपनी आजीविका को सशक्त बना सकते हैं।









