सुकमा।
हिंसा और भटकाव की राह छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए बण्डो राकेश उर्फ जोगेन्द्र के जीवन में खुशहाली की नई रोशनी आई है। वर्ष 2016 में सुकमा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आत्मसमर्पण करने के बाद अब उनके सिर पर पक्की छत का सपना साकार हो गया है।
सुकमा एसपी ऑफिस में किया था सरेंडर
बण्डो राकेश ने करीब आठ साल पहले हथियार डालकर शांति का मार्ग चुना था। जिला प्रशासन ने छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें हर संभव सहयोग और सहायता उपलब्ध कराई। वर्तमान में वे एक सामान्य नागरिक की तरह सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उनके जीवन में सबसे बड़ा बदलाव तब आया, जब वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की विशेष परियोजना के तहत पक्के मकान की स्वीकृति मिली।
जीरमपाल के मुतोड़ी में बनकर तैयार हुआ घर
सुकमा जिला पंचायत और जनपद पंचायत के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत जीरमपाल (मुतोड़ी) ने इस आवास का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया है। पक्का मकान मिलने से बण्डो राकेश और उनका परिवार अब सुरक्षित महसूस कर रहा है। कभी जंगलों में असुरक्षा के बीच रहने वाले राकेश के लिए यह मकान एक नए और सम्मानजनक भविष्य की मजबूत नींव बन गया है। शासन की पुनर्वास नीति ने उन्हें समाज में सिर उठाकर जीने का मौका दिया है।
बण्डो राकेश की यह कहानी उन गुमराह युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो किसी भी कारण से हिंसा की राह पर चले गए हैं। उनका बदला हुआ जीवन यह संदेश देता है कि बंदूक नहीं, बल्कि शांति, विकास और शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं ही खुशहाल भविष्य का रास्ता हैं। सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब बंदूकों की गूंज की जगह विकास, रोजगार और बेहतर कल की उम्मीद दिखाई दे रही है।









