Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

22 साल बाद हाईकोर्ट से न्याय: बैंक प्रबंधक रिश्वत मामले में दोषमुक्त

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

Listen to this article
  • बैंक प्रबंधक की मौत के बाद पत्नी और बेटों ने की लंबा कानूनी संघर्ष, हाईकोर्ट ने दी राहत

बिलासपुर।

22 साल तक चले कानूनी संघर्ष के बाद, बैंक प्रबंधक राजेन्द्र कुमार यादव के परिवार को आखिरकार न्याय मिला। उच्च न्यायालय ने यादव को रिश्वत लेने के आरोपों से मुक्त करते हुए निचली अदालत के फैसले को खारिज कर दिया है। इस मामले में राजेन्द्र कुमार यादव पर वर्ष 2000-01 में बेमेतरा की कृषि एवं भूमि विकास बैंक शाखा में कार्यरत रहते हुए एक किसान से रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था।

दुर्ग निवासी राजेन्द्र कुमार यादव, जो उस समय बेमेतरा में शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे, पर आरोप था कि उन्होंने ग्राम एरमसाही, नवागढ़ ब्लॉक के किसान धीरेन्द्र कुमार शुक्ला से बोरवेल खुदाई के लिए सरकारी योजना के तहत लोन देने के एवज में रिश्वत मांगी थी। यादव ने शुक्ला से प्रोसेस शुल्क के रूप में 526 रुपए जमा करने को कहा था, जिसे शिकायतकर्ता ने रिश्वत के रूप में लोकायुक्त में दर्ज कराया।

लोकायुक्त रायपुर की टीम ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मई 2001 में यादव को केमिकल लगे करेंसी नोट के साथ ट्रेप कर गिरफ्तार कर लिया था। विशेष न्यायाधीश ने 2003 में यादव को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और धारा 13 (डी) 1 के तहत दोषी ठहराते हुए कैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी।

परिवार का संघर्ष:

इस फैसले के खिलाफ यादव ने हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन अपील के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई। उनके निधन के बाद, उनकी पत्नी उतम कुमारी यादव और उनके बेटे प्रशांत और निशांत यादव ने मुकदमे को आगे बढ़ाया।

न्यायालय का अंतिम निर्णय:

हाईकोर्ट में 22 साल बाद, अगस्त 2024 में इस मामले पर अंतिम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता ने वास्तव में प्रोसेस शुल्क के रूप में 526 रुपए दिए थे, जिसके लिए यादव ने रसीद भी जारी की थी। अदालत ने यह भी पाया कि ट्रेप टीम द्वारा यादव के जेब से जब्त किए गए करेंसी नोटों की संख्या और उनके सीरियल नंबर की कोई सटीक जानकारी दर्ज नहीं की गई थी।

अंततः हाईकोर्ट ने यादव को रिश्वत के आरोपों से मुक्त करते हुए निचली अदालत के फैसले को खारिज कर दिया।

news paper editing
previous arrow
next arrow

Leave a Comment