15 सितम्बर 2026 |
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जलजीवन मिशन की जमीनी हकीकत: करोड़ों की योजना, फिर भी सूखे नल

OM Darpan

Mar 12, 2025 08:56 am 250 views
जलजीवन मिशन की जमीनी हकीकत: करोड़ों की योजना, फिर भी सूखे नल

बेमेतरा।

जलजीवन मिशन के तहत गांवों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना अपने उद्देश्यों पर खरी नहीं उतर रही। जिले के ग्राम मटका और साजा ब्लॉक के भरदाकला में नल और कनेक्शन तो लगाए गए, लेकिन उनमें पानी नहीं आ रहा। ग्रामीणों के लिए यह योजना अब महज एक सपना बनकर रह गई है। ग्राम मटका में ही इस परियोजना पर एक करोड़ से अधिक खर्च किया जा चुका है, बावजूद इसके, पानी टंकी में जल आपूर्ति के लिए आवश्यक बोर खनन तक नहीं हुआ।

कागजों में सप्लाई, हकीकत में सूखा

सरकारी दावों के अनुसार, ग्राम मटका और भरदा लोधी में जल आपूर्ति हो रही है, लेकिन ग्रामीणों को आज तक एक बूंद पानी भी नहीं मिला। भरदा लोधी में 48 लाख की इस योजना के तहत पानी टंकी तो बनाई गई, लेकिन जलस्रोत तैयार नहीं किया गया। हालात इतने खराब हैं कि 2024 में अनियमितताओं के चलते ईई धनंजय को निलंबित भी किया गया था, लेकिन अब तक गड़बड़ियों में कोई सुधार नहीं हुआ है।

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‘छत्तीसगढ़’ द्वारा की गई पड़ताल में ग्राम मटका की हकीकत सामने आई। ग्रामीणों का कहना है कि जब से पानी टंकी बनी है, तब से नलों से पानी नहीं आया। 2021 में शुरू की गई इस योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई और हर घर में नल कनेक्शन दिया गया, लेकिन पानी की सप्लाई एक दिन भी नहीं हुई।

330 घरों में जल आपूर्ति का दावा, लेकिन हकीकत कुछ और

सरकारी रिपोर्ट में बताया गया कि ग्राम मटका के 343 में से 330 घरों में पेयजल सप्लाई हो रही है, जबकि 13 घरों में कार्य जारी है। इतना ही नहीं, 3 स्कूल और 2 आंगनबाड़ी केंद्रों में भी जल आपूर्ति का दावा किया गया है। लेकिन ग्रामीणों के अनुसार, यह केवल कागजी दावे हैं, जमीनी सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।

पावर पंप गायब, फिर भी 55 लीटर पानी सप्लाई का दावा!

मटका गांव में इस योजना को सरकारी रिकॉर्ड में सक्रिय दिखाया गया है और प्रति व्यक्ति 55 लीटर पानी प्रतिदिन की आपूर्ति का उल्लेख है, लेकिन हकीकत में नल सूखे पड़े हैं।

गांव में 7 पावर पंप में से 4 बंद हो चुके हैं, और सिर्फ 3 पंपों के सहारे 2005 ग्रामीण जैसे-तैसे पानी की जरूरत पूरी कर रहे हैं। ग्राम सरपंच मनाराम साहू ने बताया कि तीन साल पहले पंचायत के बोर से पानी टेस्टिंग की गई थी, उसके बाद से अब तक एक बूंद भी सप्लाई नहीं हुई। पंच रमेश यदु ने बताया कि बोरवेल की खुदाई ही नहीं की गई, जिससे जलस्तर लगातार गिर रहा है

लाखों खर्च, फिर भी फेल हुआ जलजीवन मिशन

गांव के बिरेन्द पटेल, धन्नू साहू और मोहन के अनुसार, यह योजना पूरी तरह से विफल हो चुकी है। पानी टंकी को हाल ही में रंग-रोगन कर चमका दिया गया, लेकिन पानी का इंतज़ाम अब तक नहीं किया गया।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब योजना पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, तो पानी आखिर कहां है? सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई है, और इसकी भरपाई ग्रामीणों को पानी के अभाव में करनी पड़ रही है।

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