Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

सुप्रीम कोर्ट से पूर्व IAS अनिल तुतेजा को बड़ी राहत, 2.5 साल बाद मिली जमानत

Former IAS Anil Tuteja Bail

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

Listen to this article

नई दिल्ली/रायपुर।

सुप्रीम कोर्ट ने जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) घोटाले और भ्रष्टाचार के मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल तुतेजा को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है। उन पर डीएमएफ के करोड़ों रुपये के सिविल निर्माण अनुबंधों को प्रभावित कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाने का आरोप है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए तुतेजा को जमानत तो दे दी, लेकिन मामले के गवाहों को प्रभावित करने से रोकने के लिए उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहने का सख्त निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि तुतेजा को एक सप्ताह के भीतर अपना नया पता (राज्य से बाहर का) अदालत को देना होगा और सुनवाई की प्रत्येक तारीख पर न्यायालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित होना होगा।

इससे पहले शराब घोटाला मामले में पूर्व IAS अनिल तुतेजा को ED ने गिरफ्तार किया था।
Read More: “शराब घोटाला केस में पूर्व IAS अनिल तुतेजा गिरफ्तार”

और

उल्लेखनीय है कि इससे पहले उनकी जमानत याचिका निचली अदालत से खारिज हो चुकी थी।
Read More: “अनिल तुतेजा की जमानत याचिका पहले हुई थी खारिज”

राज्य सरकार ने किया कड़ा विरोध, कहा- आदतन अपराधी हैं तुतेजा

अदालत में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने तुतेजा को जमानत दिए जाने का कड़ा विरोध किया। राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता रवि शर्मा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि तुतेजा एक “आदतन अपराधी” हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि शराब, कोयला और सट्टेबाजी से संबंधित राज्य के कई बड़े “घोटालों” में तुतेजा शामिल रहे हैं। शर्मा ने कड़े शब्दों में कहा, “सभी घोटालों में उनका हाथ है।”

बचाव पक्ष की दलील- डीएमएफ ठेकों से कोई लेना-देना नहीं

अनिल तुतेजा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने राज्य के आरोपों का खंडन किया। उन्होंने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल पिछले ढाई साल से एक विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में बंद हैं। इस मामले में 85 गवाहों को पेश किया गया है और नौ आरोपी अभी भी मुकदमे की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता आलम ने तर्क दिया कि तुतेजा उस समय उद्योग विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर तैनात थे, जबकि डीएमएफ के ठेके और सिविल कार्य संबंधित जिला कलेक्टरों द्वारा जारी किए गए थे। ऐसे में इस मामले में उनके मुवक्किल की न तो कोई भूमिका थी और न ही वे इसमें सीधे तौर पर शामिल थे।

‘एक में जमानत मिलती है, दूसरी FIR दर्ज हो जाती है’

बचाव पक्ष के वकील ने अदालत का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि राज्य सरकार ने सितंबर 2024 में तुतेजा को इस मामले में “मुख्य आरोपी” बताया था, लेकिन उनकी गिरफ्तारी फरवरी 2026 में की गई।

अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ मुकदमों का “लगातार दोहराव” किया जा रहा है। जैसे ही तुतेजा को किसी एक मामले में जमानत मिलने वाली होती है, उनके खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। मुवक्किल की ओर से अपील करते हुए वकील ने कहा, “मैं सेवानिवृत्त हो चुका हूँ। मुझे छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर निकाल दीजिए। मैं बस अपने परिवार के साथ रहना चाहता हूँ।”

omdarpanprmot-01
previous arrow
next arrow