15 सितम्बर 2026 |
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

आय से अधिक संपत्ति, राजद्रोह और ब्लैकमेलिंग के मामलों में IPS जीपी सिंह को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने की तीनों FIR खारिज

OM Darpan

Nov 14, 2024 08:18 am 180 views
[smartslider3 slider=6]
 
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी जीपी सिंह को बुधवार को बड़ी राहत मिली, जब हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति, राजद्रोह और ब्लैकमेलिंग के तीनों मामलों में एफआईआर को रद्द कर दिया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद इस फैसले को जारी किया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि, जीपी सिंह को राजनीतिक षड्यंत्र के तहत इन मामलों में फंसाया गया है, जिनमें उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले। वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गर्ग ने चंडीगढ़ से वर्चुअल रूप में अदालत में पैरवी की और पक्ष रखा।
राजनीतिक साजिश के तहत फंसाने का आरोप जीपी सिंह ने हाईकोर्ट में अपने अधिवक्ता हिमांशु पांडेय के माध्यम से याचिका दायर कर सभी तीन एफआईआर को चुनौती दी थी। याचिका में तर्क दिया गया कि, तत्कालीन राज्य सरकार ने उनके खिलाफ षड्यंत्र रचकर झूठे मामले दर्ज करवाए। हाईकोर्ट ने जांच में पाया कि बिना ठोस सबूतों के उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर परेशान किया गया है, और इनमें से कोई भी मामला चलने योग्य नहीं है। सभी पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने तीनों एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया।
जब्त सोने पर विवाद जीपी सिंह के वकील ने संपत्ति से जुड़े मामले में अदालत को बताया कि जिस व्यक्ति से सोना जब्त हुआ है, उसे एसीबी ने आरोपी नहीं बनाया, जबकि जीपी सिंह पर उसे अपनी संपत्ति बताकर मामला दर्ज कर दिया गया। साथ ही, जिस स्कूटी से सोना बरामद किया गया, वह भी जीपी सिंह या उनके परिवार के नाम पर नहीं पाई गई।
राजद्रोह का मामला भी साबित नहीं राजद्रोह के आरोप में अधिवक्ता हिमांशु पांडेय ने कोर्ट को बताया कि, जीपी सिंह के निवास से मिले कुछ कटे-फटे कागज के टुकड़ों को आधार बनाकर राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया। इस पर कोर्ट ने कहा कि उन टुकड़ों से किसी भी प्रकार की साजिश का संकेत नहीं मिलता। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा प्रस्तुत जवाब में भी यह स्पष्ट किया गया कि कागजों की रेडियोग्राफी से कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता।
सरकार गिराने की साजिश का आरोप और छापेमारी का घटनाक्रम 2021 में एसीबी ने जीपी सिंह के सरकारी आवास समेत विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की थी और दावा किया था कि लगभग 10 करोड़ की अघोषित संपत्ति और संवेदनशील दस्तावेज बरामद किए गए। इसके बाद उन पर सरकार गिराने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया गया, जिसके चलते जुलाई 2021 में उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
कैट का फैसला और बहाली की चुनौती इससे पहले 30 अप्रैल को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) ने चार हफ्तों के भीतर जीपी सिंह से जुड़े सभी मामलों का निराकरण कर उन्हें बहाल किए जाने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले पर केंद्र को सिफारिश भेजी, हालांकि केंद्र सरकार ने कैट के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिससे बहाली का मामला अटका हुआ है। अब इस पर सुनवाई दिसंबर में प्रस्तावित है।
जीपी सिंह के खिलाफ घटनाक्रम संक्षेप में
  • 1 जुलाई 2021: सुबह 6 बजे एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम ने रायपुर, राजनांदगांव और ओडिशा में एक साथ छापेमारी की और जीपी सिंह पर एफआईआर दर्ज की गई।
  • 2 जुलाई 2021: दिन भर की जांच के बाद 5 करोड़ की चल-अचल संपत्ति का खुलासा किया गया।
  • 5 जुलाई 2021: राज्य सरकार ने एडीजी जीपी सिंह को निलंबित कर दिया, उनके खिलाफ वसूली और धमकाने के आरोप भी लगे।
  • जनवरी 2022: गुरुग्राम से गिरफ्तार कर रायपुर लाए गए।
  • जुलाई 2023: केंद्र सरकार ने उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी।
 
Tags

शेयर करें

विज्ञापन / Advertisement

Government Advertisement
260915140221541

विज्ञापन

Advertisement