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आपातकाल के संघर्ष को याद कर भावुक हुए मुख्यमंत्री, ‘आपातकाल के योद्धा’ स्मारिका का किया विमोचन

आपातकाल स्मृति दिवस में लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान करते मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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आपातकाल स्मृति दिवस में लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान करते मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 

आपातकाल स्मृति दिवस में लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान करते मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

  • सेनानियों के त्याग और संघर्ष का हुआ सम्मान

  • युवाओं को लोकतंत्र के प्रति किया जागरूक

रायपुर।

राजधानी के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित ‘आपातकाल स्मृति दिवस’ के अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों का भव्य सम्मान किया गया। इस गरिमामयी समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिरकत की और आपातकाल के दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल जाने वाले सेनानियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान सेनानियों के संघर्ष पर आधारित विशेष स्मारिका ‘आपातकाल के योद्धा’ का विमोचन किया और निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया।

मुख्यमंत्री के परिवार ने भी झेली थी यातनाएं

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपने पारिवारिक संदर्भों को साझा करते हुए भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि साय ने 19 महीनों तक जेल की कठोर यातनाएं झेली थीं। मुख्यमंत्री ने उस दौर की पीड़ा को याद करते हुए कहा कि जब घर के मुखिया को जेल में डाल दिया जाता था, तब परिवारों पर जीवन निर्वाह का संकट आ जाता था। उन्होंने उन स्वयंसेवकों को भी याद किया जो भेष बदलकर सेनानियों के घरों तक अनाज पहुंचाते थे ताकि कोई परिवार भूखा न सोए।

राष्ट्र प्रथम की भावना ही असली शक्ति

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इंद्रेश कुमार ने अपने संबोधन में लोकतंत्र को केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि एक जीवन मूल्य बताया। उन्होंने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए कठिन परीक्षा का काल था, जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचला गया। इंद्रेश कुमार ने युवाओं से आह्वान किया कि वे ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को जीवन में अपनाएं और नशामुक्त व स्वच्छ समाज के निर्माण में योगदान दें। उन्होंने अयोध्या को सत्य और धर्म का मार्ग बताते हुए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की सीख दी।

संविधान की रक्षा के लिए सजग रहने की जरूरत

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने 1975 के कालखंड को लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती करार दिया। उन्होंने प्रेस सेंसरशिप और मौलिक अधिकारों के निलंबन का उल्लेख करते हुए कहा कि वह दौर हमें लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सदैव सजग रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती हमेशा से संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति आस्था की भूमि रही है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिए कि आने वाली पीढ़ी को इस इतिहास से अवगत कराने के लिए इस विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करना एक सराहनीय कदम होगा।

निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान

समारोह में राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को नकद राशि और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। विद्यालय स्तर पर ‘आपातकाल कभी विस्मृत न हो’ विषय पर जे.आर. दानी गर्ल्स स्कूल, रायपुर की जागृति जांगड़े ने प्रथम स्थान प्राप्त कर 31 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि जीती। वहीं महाविद्यालय स्तर पर ’25 जून : संविधान हत्या दिवस’ विषय पर कल्याणी पटले ने बाजी मारी। प्रतियोगिता में प्रदेशभर के 540 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था, जिनकी सक्रियता की मुख्यमंत्री ने जमकर सराहना की।

समारोह में उमड़ा दिग्गजों का हुजूम

इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी और विधायक मोतीलाल साहू सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम में विधायक गोमती साय, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव और बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मंच पर मौजूद अतिथियों ने संविधान सेनानियों और उनके परिजनों का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें लोकतंत्र का असली रक्षक बताया।

 

 

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