अंबिकापुर (पंकज शुक्ला)।
गांधी जयंती के दिन सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित प्रतिष्ठित कार्मेल स्कूल पर विवाद खड़ा हो गया है। स्कूल में कथित रूप से कैथोलिक धर्म सभा के आयोजन ने एक बड़े हंगामे को जन्म दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा कलेक्टर विलास भोस्कर ने स्कूल की मान्यता रद्द करने की अनुशंसा की है। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि स्कूल प्रबंधन के जवाब से असंतुष्ट प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
गांधी जयंती पर धर्म सभा: विवाद का मुख्य कारण
गांधी जयंती, जो कि एक राष्ट्रीय अवकाश का दिन है, उस दिन अंबिकापुर के कार्मेल स्कूल में कथित तौर पर करीब 200 छात्रों को स्कूल बुलाया गया। आरोप है कि इस दिन स्कूल में कैथोलिक बाल धर्म सभा का आयोजन किया गया, जिसमें न केवल ईसाई समुदाय के बच्चे, बल्कि अन्य धर्मों के बच्चों को भी सम्मिलित किया गया। अभिभावकों द्वारा जब इस बात की जानकारी मिली, तो उनमें आक्रोश फैल गया और उन्होंने प्रशासन से इसकी शिकायत की। शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एसडीएम, जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और पुलिस की एक टीम को मौके पर भेजा।
जांच में स्कूल प्रबंधन का ढुलमुल जवाब
जांच के दौरान स्कूल में बच्चों की उपस्थिति की पुष्टि हुई। इसके बाद, जिला प्रशासन ने कार्मेल स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी किया। स्कूल प्रबंधन ने धर्म सभा के आयोजन से इनकार किया, लेकिन प्रशासन उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। कलेक्टर विलास भोस्कर ने स्कूल पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रबंधन ने बार-बार अपने प्रशासनिक और नैतिक दायित्वों का उल्लंघन किया है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की घटनाएं सामने आई हैं।
आदिवासी ईसाई महासभा और विश्व हिंदू परिषद की प्रतिक्रिया
इस विवाद के बढ़ने के बाद आदिवासी ईसाई महासभा ने कार्मेल स्कूल का समर्थन किया है, जबकि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इसे धार्मिक मतांतरण का मामला बताते हुए कड़ी निंदा की है। विहिप ने मांग की है कि स्कूल की मान्यता को तुरंत रद्द किया जाए। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर तनाव को और बढ़ा दिया है।
कलेक्टर की सख्त टिप्पणी और अनुशंसा
कलेक्टर विलास भोस्कर ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया कि धर्म निरपेक्षता भारतीय संविधान की आत्मा है, और किसी भी शैक्षणिक संस्था में विशेष धर्म की शिक्षा देना संविधान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा से छात्रों के मन में भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक विचार उत्पन्न हो सकते हैं, जिससे समाज में विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है। कलेक्टर ने यह भी कहा कि स्कूल प्रबंधन ने अपने प्रशासनिक और नैतिक उत्तरदायित्वों का सही तरीके से पालन नहीं किया, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर भी असर पड़ा है।
कलेक्टर ने यह अनुशंसा की है कि स्कूल की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को स्कूल की मान्यता रद्द करने की सिफारिश भेज दी है। इसके अलावा, कलेक्टर ने राज्य सरकार से स्कूल के आय-व्यय का ऑडिट कराने की भी मांग की है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की जांच की जा सके।
कानून व्यवस्था और विवाद
यह पहली बार नहीं है जब कार्मेल स्कूल विवादों में आया है। इससे पहले भी, 8 महीने पहले स्कूल की एक छात्रा की आत्महत्या के बाद स्कूल प्रशासन पर सवाल उठे थे। छात्रा के परिजनों ने आरोप लगाया था कि स्कूल की एक शिक्षिका द्वारा प्रताड़ित किए जाने के कारण छात्रा ने यह कदम उठाया। इसके अलावा, सरस्वती पूजा आयोजित न करने को लेकर भी स्कूल प्रबंधन और छात्रों के बीच विवाद हुआ था।
ऑडिट की अनुशंसा और आगामी कार्रवाई
कलेक्टर विलास भोस्कर ने अपने नोटिस में यह भी कहा कि कार्मेल स्कूल के प्रबंधन ने कई बार प्रशासनिक विफलताओं का प्रदर्शन किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्कूल की गड़बड़ियों की जांच के लिए राज्य स्तरीय ऑडिट टीम से स्कूल के वित्तीय मामलों की जाँच की जानी चाहिए। स्कूल में आय-व्यय में किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका को देखते हुए यह ऑडिट जरूरी माना जा रहा है।
क्या होगा आगे?
जिला प्रशासन द्वारा की जा रही इस कार्रवाई के बाद अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा स्कूल की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया कब पूरी की जाएगी। इस विवाद ने अंबिकापुर और आसपास के क्षेत्र में शिक्षा और धर्म के बीच उठे सवालों को और गहरा कर दिया है।







