



रायपुर।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बिटकॉइन घोटाले से जुड़े मामले की जांच तेज करते हुए बुधवार को रायपुर स्थित गौरव मेहता के घर छापा मारा। गौरव मेहता पुणे पुलिस की मदद कर रहे थे, जो 6,600 करोड़ रुपये के बिटकॉइन घोटाले की जांच में जुटी थी। इस घोटाले के केंद्र में क्रिप्टोकरेंसी व्यापारी अमित भारद्वाज का नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आया है।
ईडी के अधिकारियों ने गौरव मेहता के घर पर कई दस्तावेजों की तलाशी ली। गौरव मेहता एक कंसल्टेंसी के लिए काम करते हैं, जिसे पुणे पुलिस द्वारा इस बड़े घोटाले की फॉरेंसिक जांच में सहायता करने के लिए नियुक्त किया गया था। हालांकि, मंगलवार को पूर्व आईपीएस अधिकारी रवींद्रनाथ पाटिल द्वारा किए गए एक खुलासे ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया। पाटिल ने आरोप लगाया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की नेता सुप्रिया सुले और महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने गौरव मेहता से संपर्क किया था और आगामी चुनाव अभियानों के लिए बिटकॉइन के बदले नकदी की मांग की थी। इस आरोप ने महाराष्ट्र के राजनीतिक माहौल में हलचल पैदा कर दी है।
मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के बीच, ईडी ने रायपुर में मेहता के घर पर छापेमारी को अंजाम दिया। गौरव मेहता द्वारा की गई गवाही में उल्लेख किया गया है कि 2018 के क्रिप्टोकरेंसी घोटाले की जांच के दौरान, बिटकॉइन युक्त एक वॉलेट जब्त किया गया था। मेहता ने दावा किया कि यह वॉलेट बाद में पुणे के तत्कालीन पुलिस आयुक्त अमिताभ गुप्ता के निर्देश पर बदल दिया गया था।
पूर्व आईपीएस अधिकारी रवींद्रनाथ पाटिल के आरोप
पाटिल ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि क्रिप्टोकरेंसी घोटाले से जुड़े इस वॉलेट से मिली नकदी का उपयोग 2019 के लोकसभा चुनाव और वर्तमान महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव अभियानों में किया गया। उन्होंने दावा किया कि पुणे के तत्कालीन पुलिस आयुक्त अमिताभ गुप्ता और साइबर अपराध जांचकर्ता भाग्यश्री नवटके इस घोटाले में शामिल थे और उन्हें सुप्रिया सुले और नाना पटोले का संरक्षण प्राप्त था।
पाटिल ने बताया कि उन्हें इस घोटाले में फंसाने के लिए गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया था, जबकि असली अपराधी अमिताभ गुप्ता और उनकी टीम थी। इस संदर्भ में, गौरव मेहता ने पाटिल से संपर्क कर 2018 के घोटाले से संबंधित जानकारियां साझा कीं, जिससे मामले में और अधिक गंभीर सवाल उठ खड़े हुए।
पाटिल का बयान और फॉरेंसिक ऑडिट का खुलासा
पूर्व आईपीएस पाटिल ने बताया कि 2018 के बिटकॉइन घोटाले की फॉरेंसिक ऑडिट के लिए केपीएमजी को नियुक्त किया गया था, जिसका नेतृत्व उन्होंने किया था। हालांकि, साल 2022 में पाटिल को इसी मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था और उन्होंने 14 महीने जेल में बिताए। इस दौरान, उन्होंने अपने और अन्य आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करने का प्रयास किया। इस जांच के परिणामस्वरूप उन्हें कुछ ऐसे तथ्य मिले जिनसे घोटाले में उच्च स्तर पर राजनीतिक संरक्षण की बात उजागर होती है।
पाटिल ने कहा कि मामले के गवाह गौरव मेहता ने आरोप लगाया कि बिटकॉइन हेरफेर से प्राप्त नकदी का इस्तेमाल महाराष्ट्र के चुनाव अभियानों के लिए किया गया। पाटिल ने यह भी दावा किया कि इस घोटाले में सुप्रिया सुले और नाना पटोले के नाम शामिल हैं और उन्होंने गौरव मेहता से संपर्क किया था ताकि चुनाव में उपयोग के लिए नकदी की व्यवस्था की जा सके।
ईडी की जांच जारी
ईडी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है और गौरव मेहता के घर से जब्त दस्तावेजों की छानबीन कर रही है। ईडी का उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग और घोटाले के अन्य पहलुओं की तह तक पहुंचना है। राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, और महाराष्ट्र की राजनीति में इस घोटाले का असर देखने को मिल सकता है।





