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सुकमा में 1 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली ने किया आत्मसमर्पण, छत्तीसगढ़ की नक्सल उन्मूलन नीति का दिखा असर

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सुकमा.

जिला सुकमा के अंतर्गत सक्रिय 1 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली पदाम सोमे (उम्र 29 वर्ष, जाति मुरिया), जो जनताना सरकार अध्यक्षा, सिंघनमड़गू आरपीसी अंतर्गत कार्यरत थी, ने नक्सल संगठन को छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के उद्देश्य से आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण की यह घटना आज दिनांक 06 नवम्बर 2024 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जिला सुकमा में निरीक्षक अविलाष टण्डन, प्रभारी डीआरजी सुकमा और उप निरीक्षक निरंजन वराड, डीआईजी रेंज सुकमा के समक्ष हुई।

क्षेत्रीय गतिविधियों में रही थी शामिल आत्मसमर्पित महिला नक्सली पदाम सोमे थाना गोलापल्ली, मरईगुड़ा, किस्टाराम और चिंतागुफा क्षेत्र में सक्रिय नक्सल गतिविधियों में शामिल रही है। छत्तीसगढ़ शासन की “छत्तीसगढ़ नक्सलवाद उन्मूलन एवं पुनर्वास नीति” और “नियद नेल्ला नार” योजना से प्रभावित होकर तथा अंदरूनी क्षेत्रों में लगातार नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना और पुलिस के बढ़ते प्रभाव के कारण इसने आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया।

आरएफटी सुकमा की रही विशेष भूमिका महिला नक्सली के आत्मसमर्पण में (आरएफटी सुकमा) की आसूचना शाखा की विशेष भूमिका रही। उनकी प्रभावशाली कोशिशों से महिला नक्सली को आत्मसमर्पण करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। जिला सुकमा में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल उन्मूलन नीति और सुकमा पुलिस द्वारा संचालित “नियद नेल्ला नार” योजना के तहत यह आत्मसमर्पण संभव हो पाया।

अमानवीय शोषण और भेदभाव से तंग आकर किया आत्मसमर्पण महिला नक्सली ने नक्सलियों के अमानवीय, आधारहीन विचारधारा, शोषण, अत्याचार और बाहरी नक्सलियों द्वारा स्थानीय आदिवासियों पर भेदभावपूर्ण व्यवहार से तंग आकर आत्मसमर्पण किया है। अति संवेदनशील अंदरूनी क्षेत्रों में पुलिस के बढ़ते प्रभाव से महिला नक्सली ने समाज की मुख्यधारा में जुड़ने का संकल्प लिया।

आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास और सहायता उक्त आत्मसमर्पित महिला नक्सली को छत्तीसगढ़ नक्सलवाद उन्मूलन एवं पुनर्वास नीति के तहत सहायता राशि व अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जिससे वह समाज में नई शुरुआत कर सके।

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