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जी7 शिखर सम्मेलन: प्रधानमंत्री मोदी ने ‘भरोसे’ को बताया सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्ति, समुद्री व्यापार और शांति पर दिया जोर

जी7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने भरोसे और समुद्री व्यापार पर दिया जोर

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  • फ्रांस के एवियन में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘संतुलित और समावेशी विकास’ पर आधारित सत्र में रखा भारत का पक्ष।

  • पश्चिम एशिया संघर्ष और समुद्री व्यापार बाधाओं पर जताई चिंता, संवाद और कूटनीति को बताया तनाव का एकमात्र समाधान।

एवियन।

जी7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को फ्रांस के एवियन में आयोजित ग्रुप ऑफ सेवन (जी7) शिखर सम्मेलन के दौरान ‘संतुलित, समावेशी और सतत आर्थिक विकास’ पर आधारित कार्य सत्र में हिस्सा लिया। इस सत्र से पहले प्रधानमंत्री ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की कार्यकारी निदेशक क्रिस्टालिना जियोरगीवा सहित विश्व के कई बड़े नेताओं से मुलाकात की। इससे पूर्व मंगलवार को वे आउटरीच सत्र का हिस्सा बने थे, जहां उन्होंने पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों का स्वागत करते हुए संघर्ष के कारण हुई जान-माल की हानि पर दुख व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि होर्मुज में समुद्री व्यापार बाधित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है और तनाव का स्थायी समाधान केवल संवाद, कूटनीति व सहयोग से ही संभव है। संघर्ष में भारतीय नागरिकों की जान जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने नाविकों की सुरक्षा को साझा जिम्मेदारी बताया और सुरक्षित समुद्री मार्ग की वकालत की। उन्होंने चेतावनी दी कि व्यापार और तकनीक के दुरुपयोग से वैश्विक विश्वास में कमी आ रही है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘मानवता पहले’ के सिद्धांत को दोहराते हुए मोदी ने कहा कि आज दुनिया संसाधनों की नहीं बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है, जो कि वर्तमान में सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति है।

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