रायपुर:
छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया है और पहले ही दिन शिक्षा व्यवस्था में भारी कमी का मुद्दा उठ गया। विशेष रूप से रायपुर जिले में 1954 शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। यह समस्या शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदार संभाल रहे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा में बताया कि रायपुर जिले में कुल 7939 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 1954 पद वर्तमान में खाली हैं। उन्होंने कहा कि इन पदों को पदोन्नति के माध्यम से भरा जा रहा है, लेकिन सीधी भर्ती के रिक्त पदों को भरने के लिए कोई ठोस समयसीमा अभी तक घोषित नहीं की गई है।
बीजेपी विधायक मोतीलाल साहू ने इस मुद्दे को और गंभीरता से उठाया। उन्होंने अपने क्षेत्र के 90 स्कूलों का उदाहरण देते हुए कहा कि इनमें से अधिकांश में शिक्षकों की कमी है। कई स्कूलों में तो शिक्षक ही नहीं हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
विधानसभा में शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने भाजपा नेताओं को घेरते हुए रामलला को उपहार में दिए गए बेर पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बेर का सीजन नहीं है और न ही शिवरीनारायण या रायपुर में बेर मिल रहे हैं, फिर अयोध्या में बेर कैसे उपलब्ध कराए गए?
इस तरह की समस्याओं और मुद्दों पर गहरी छानबीन और सुधार की आवश्यकता है, ताकि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो सके और लोगों की समस्याओं का समाधान हो सके।






