Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

शिकसा स्थापना दिवस समारोह का भव्य आयोजन, शिक्षकों की प्रतिभा को मिला सम्मान

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

  • छत्तीसगढ़ की शिक्षक कला और साहित्य अकादमी का 6वां स्थापना दिवस कार्यक्रम

दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।

छत्तीसगढ़ की शिक्षक कला और साहित्य अकादमी द्वारा 6वीं स्थापना दिवस के अवसर पर “शिकसा स्थापना दिवस समारोह” का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का संयोजन डॉ. शिवनारायण देवांगन “आस” ने किया और कार्यक्रम प्रभारी विजय कुमार प्रधान की उपस्थिति में इसे आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता टीकाराम सारथी “हसमुख”, प्राचार्य चुरतेली ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना, जिसे कामती ठाकुर, प्रधान पाठक सिवनी बेमेतरा ने प्रस्तुत किया, और राजगीत, जिसे अनामिका चक्रवर्ती सुनीति, शिक्षक रायपुर ने प्रस्तुत किया, के साथ हुआ।

डॉ. शिवनारायण देवांगन “आस”, संस्थापक और संयोजक, ने स्थापना दिवस पर प्रकाश डालते हुए कहा, “हमारी संस्था ने 5 वर्ष पूरे कर 6वें वर्ष में प्रवेश किया है। इन 5 वर्षों में हमने 400 से अधिक ऑनलाइन और 50 से अधिक ऑफलाइन कार्यक्रमों का आयोजन कर एक इतिहास रच दिया है।” उन्होंने सभी को इस सफलता पर बधाई दी।

प्रांताध्यक्ष कौशलेंद्र पटेल ने कहा, “पिछले पांच सालों में शिकसा न केवल छत्तीसगढ़ में, बल्कि अन्य राज्यों में भी अपनी पहचान बना चुका है। यह डॉ. शिवनारायण देवांगन ‘आस’ की कड़ी मेहनत और लगन का परिणाम है।”

महासचिव डॉ. बोधीराम साहू ने सचिव प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा, “शिक्षक कला और साहित्य अकादमी अब एक परिवार के रूप में ‘शिकसा’ के नाम से जानी जाती है, जिसकी महक हर शिक्षक तक पहुंच चुकी है। यह हमारे संयोजक ‘आस’ की कड़ी मेहनत का परिणाम है।”

संगठन मंत्री राधेश्याम कंवर ने कहा, “जो भी शिक्षक ‘शिकसा’ के संपर्क में आता है, उसकी प्रतिभा में निखार आता है और उसे बड़े सम्मानों से नवाजा जाता है।”

कार्यक्रम प्रभारी विजय कुमार प्रधान ने कहा, “शिकसा निरंतर ऑनलाइन कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिसमें हजारों शिक्षक सम्मानित हो चुके हैं। यहां हर किसी को समानता का अधिकार मिलता है।”

जिलाध्यक्ष दुर्ग, होरीलाल चतुर्वेदी ने कहा, “शिकसा शिक्षकों को नई पहचान दिलाने और सम्मानित करने वाला पहला मंच है। संयोजक आस अपनी व्यक्तिगत कठिनाइयों की परवाह किए बिना लगातार कार्यक्रमों का आयोजन करते रहते हैं।”

कार्यक्रम के अध्यक्ष टीकाराम सारथी “हसमुख” ने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में कहा, “शिकसा का हर कार्यक्रम सराहनीय और प्रशंसनीय है। इसे एक परिवार के रूप में ‘आस’ ने जोड़े रखा है।”

इस अवसर पर दिनेश कुमार दुबे, ओ. पी. कौशिक “रतनपुरिहा”, मोहित कुमार शर्मा, राजीव गुप्ता, अश्वनीकुमार उइके, राजीव लोचन कश्यप, मनोहर लाल यादव, हेमराज निषाद, हरमन कुमार बघेल, चंद्रकला शर्मा, सुनीता चौधरी, शशिकला पाण्डेय, मंजू लता मेरसा “कृष्णा मानसी”, ममता साहू, विंध्यवासिनी पांडे, गुंजन वार्ष्णेय, रेखा पात्रे, किरण शर्मा, पुष्पांजलि ठाकुर, सरस्वती राघव, हेमा चंद्रवंशी, नमिता गोपाल आदि ने गीत, कविता, और विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का संचालन उषा भट्ट, व्याख्याता जंजगिरी चरोदा ने किया और आभार प्रकट किया डॉ. शिवनारायण देवांगन “आस” ने।

 

omdarpanprmot-01
previous arrow
next arrow

Leave a Comment