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छत्तीसगढ़ में ‘बिहान’ योजना से संवरी ग्रामीण महिलाओं की तकदीर: सरगुजा की कल्पना सिंह बनीं ‘लखपति दीदी’

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  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ‘बिहान’ योजना के जरिए आत्मनिर्भर बन रहीं ग्रामीण महिलाएं

✍️ विशेष संवाददाता

अम्बिकापुर | मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘बिहान’ योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। समूहों के माध्यम से महिलाएं ऋण, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग प्राप्त कर कृषि सहित विभिन्न गतिविधियों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रही हैं। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के सकालो ग्राम पंचायत की कल्पना सिंह की कहानी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है। मां महामाया महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष कल्पना सिंह ने समूह के माध्यम से 1.5 लाख रुपये का ऋण लेकर कृषि कार्य शुरू किया। उन्होंने इस राशि का उपयोग खीरे की खेती के लिए किया और वर्तमान में उनके खेत में फसल की तुड़ाई चल रही है, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है।

कल्पना सिंह हर वर्ष मौसम के अनुसार अलग-अलग फसलों और सब्जियों की खेती करती हैं, जिनमें बैंगन, टमाटर, खीरा और तरबूज शामिल हैं। अलग-अलग कृषि गतिविधियों को अपनाने से उन्हें आय के विविध स्रोत मिले हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। बिहान से जुड़ना कल्पना सिंह के लिए केवल आर्थिक बदलाव नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास में वृद्धि का भी सफर रहा है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले उनका अधिकांश समय घर की जिम्मेदारियों तक सीमित था और उन्हें बाहरी लोगों से बातचीत करने में झिझक महसूस होती थी। अब वे बैंकिंग, बाजार और कृषि व्यवसाय से जुड़ी गतिविधियों को स्वयं संभालने में सक्षम हैं।

कल्पना सिंह के अनुसार स्वयं सहायता समूह के माध्यम से समय-समय पर ऋण लेकर खेती करने से उनकी आमदनी में लगातार वृद्धि हुई है। मेहनत और नियमित कृषि गतिविधियों के बल पर वे अब ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। समूह से मिले सहयोग और ऋण की सुविधा ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। आज वे आत्मविश्वास के साथ कृषि कार्य कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में अपना योगदान दे रही हैं। उनकी कहानी इस बात की पुष्टि करती है कि स्व-सहायता समूह का साथ और मेहनत मिलकर ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बना सकता है।

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