दिल्ली।
भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) में शामिल होने के एक हफ्ते से अधिक समय बाद, आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व नेता और दिल्ली के मंत्री कैलाश गहलोत ने बुधवार को दिल्ली विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। गहलोत ने अपना इस्तीफा दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल को भेजा। गहलोत ने 17 नवम्बर को आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दिया था और भाजपा में शामिल होने के बाद अपना पहला बयान जारी किया। अपने इस्तीफे का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी दिल्ली के लोगों से की गई महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रही है।
गहलोत ने आरोप लगाया कि पार्टी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं अब जनता की सेवा और प्रतिबद्धताओं से कहीं आगे बढ़ गई हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि शीशमहल जैसे विवादों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम अब भी ‘आम आदमी’ होने में विश्वास करते हैं।
गहलोत ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार ने अपना अधिकांश समय केंद्र सरकार के साथ विवादों में बिताया और यमुना नदी की सफाई जैसे अहम मुद्दों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
गहलोत का भाजपा में शामिल होना:
आप से इस्तीफा देने के बाद, गहलोत ने 18 नवम्बर को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा की उपस्थिति में भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) का दामन थामा। भाजपा में शामिल होने के बाद गहलोत ने स्पष्ट किया कि उनका यह कदम किसी दबाव के कारण नहीं था। उन्होंने मीडिया से कहा, “कुछ लोग सोच रहे होंगे कि यह फैसला रातोंरात और किसी के दबाव में लिया गया है, लेकिन यह पूरी तरह से गलत है। मैंने आज तक कभी किसी के दबाव में कोई निर्णय नहीं लिया।”
गहलोत का इस्तीफा और भाजपा में शामिल होने का यह घटनाक्रम राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां एक ओर आम आदमी पार्टी ने गहलोत के खिलाफ ईडी और सीबीआई जांच की बात की, वहीं गहलोत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा में अपने नए सफर की शुरुआत की है।










