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कम लागत में भारी कमी
जांजगीर-चांपा।
नवागढ़ विकासखंड के ग्राम कचंदा निवासी किसान भरत दिवाकर ने आधुनिक कृषि तकनीकों के दम पर खेती को लाभ का सौदा बना दिया है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी अपनाकर उन्होंने न केवल उत्पादन बढ़ाया, बल्कि खेती की लागत में भी भारी कटौती कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणा पेश की है।
पारंपरिक खेती की चुनौतियों पर प्रहार
गौरतलब है कि किसान भरत दिवाकर पूर्व में बढ़ती कृषि लागत और उत्पादन की अनिश्चितता से जूझ रहे थे। तीन एकड़ की जोत में पारंपरिक खाद का बोझ उठाना और उसका परिवहन करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। कृषि विभाग के तकनीकी प्रोत्साहन से प्रेरित होकर उन्होंने नैनो उर्वरकों को प्रयोग के तौर पर अपनाया, जिसके सुखद परिणाम जल्द ही खेत में नजर आने लगे।
बोतलों ने खत्म किया बोरियों का बोझ
किसान दिवाकर के अनुसार, नैनो यूरिया और डीएपी की छोटी बोतलें पारंपरिक खाद की भारी बोरियों की तुलना में अधिक प्रभावी और सुविधाजनक हैं। इससे न केवल समय और श्रम की बचत हुई, बल्कि परिवहन खर्च भी शून्य हो गया। पौधों को संतुलित पोषक तत्व मिलने से फसल की चमक और वजन में वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य कृषकों से भी वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की अपील की है।









