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भिलाई में आर-पार की लड़ाई: विधायक देवेंद्र यादव का अनशन जारी; विधायक ने BSP प्रबंधन पर कसा तंज

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भिलाई / रायपुर (रोहितास सिंह भुवाल)।

भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के कथित निजीकरण और शहर की बुनियादी सुविधाओं को बचाने के लिए चल रहा ‘भिलाई सत्याग्रह’ अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। भिलाई नगर विधायक और कांग्रेस नेता देवेंद्र यादव की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 22 दिसंबर 2025 को तीसरे दिन भी जारी रही। रविवार को आंदोलन के मंच पर उस वक्त सियासी पारा चढ़ गया, जब BSP प्रबंधन के प्रतिनिधि बातचीत के लिए पहुंचे, लेकिन संवाद बेनतीजा रहा।

विधायक देवेंद्र यादव ने प्रबंधन के रवैये पर करारा तंज कसा है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। विधायक ने स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई नेहरू के सपनों के भिलाई को बचाने की है और जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे।

‘अधिकार मांगो तो कहते हैं- नींबू पानी पी लो’

बातचीत विफल होने के बाद विधायक देवेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी व्यथा और प्रबंधन की संवेदनहीनता को साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अधिकारियों के सामने भिलाईवासियों के मुद्दे रखे, तो जवाब में उन्हें केवल ‘जूस और पानी’ ऑफर किया गया।

विधायक ने वायरल पोस्ट में लिखा:

“आज बीएसपी प्रबंधन भिलाई सत्याग्रह के मंच पर संवाद करने पहुंची थी। मैंने कहा- बीएसपी आवास खाली मत कराओ, वो बोले- पानी पी लो! मैंने कहा- सेक्टर 9 हॉस्पिटल मत बेचो, वो बोले- नींबू पानी पी लो! मैंने कहा- हमारे स्कूल मत बेचो, वो बोले- जूस पी लो! मैंने कहा- नए रिटेंशन स्कीम वापस लो, वो बोले- कुछ खा लो! मैंने कहा- ये भिलाई के भविष्य की लड़ाई है इसलिए भूखा बैठा हूं। वो बोले- हमारे पास अधिकार नहीं है, किसी बड़े अधिकारी को भेजते हैं।”

विधायक ने दो टूक कहा, “हम इंतजार करेंगे और यह आंदोलन जारी रखेंगे। भिलाई को बिकने नहीं देंगे।”

‘अधिकार नहीं’ कहकर चले गए अधिकारी

सत्याग्रह के तीसरे दिन प्रबंधन के अधिकारी मंच पर तो आए, लेकिन विधायक की मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दे सके। उनका कहना था कि उनके पास निर्णय लेने का अधिकार नहीं है, वे किसी बड़े अधिकारी से बात कराएंगे। इस जवाब से आंदोलनकारियों में आक्रोश और बढ़ गया। विधायक ने आरोप लगाया कि यह केंद्र की मोदी सरकार और BSP प्रबंधन का ‘डबल इंजन’ वाला षड्यंत्र है, जिसके तहत भिलाई को उजाड़ने की कोशिश की जा रही है।

ये हैं प्रमुख मांगें

सत्याग्रह की शुरुआत 20 दिसंबर को दो दिवसीय उपवास के साथ हुई थी, लेकिन प्रशासन के उदासीन रवैये के बाद इसे अनिश्चितकालीन कर दिया गया। आंदोलन की मुख्य मांगें हैं:

  • रिटेंशन स्कीम के नए नियमों को वापस लिया जाए (जिससे किराया अंधाधुंध बढ़ रहा है)।

  • BSP आवासों को खाली न कराया जाए।

  • सेक्टर-9 अस्पताल और स्कूलों का निजीकरण रोका जाए।

  • ठेका श्रमिकों को न्यूनतम वेतन दिया जाए।

रातभर अलाव जलाकर डटे रहे समर्थक

भिलाई सत्याग्रह को व्यापक समर्थन मिल रहा है। ट्रेड यूनियन नेता, पूर्व विधायक, महापौर, पार्षद और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मंच पर पहुंच रहे हैं। कड़ाके की ठंड में भी कांग्रेस कार्यकर्ता और युवा रातभर अलाव जलाकर विधायक के साथ डटे हुए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ BSP की नहीं, बल्कि पूरे भिलाई के अस्तित्व की लड़ाई है।

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