- भारत के सबसे सफल वर्ल्ड कप गेंदबाज को क्यों नहीं मिला वर्ल्ड कप 2023 में पुरा मौका?
भारतीय क्रिकेट के लिए मोहम्मद शमी का योगदान किसी से छिपा नहीं है, लेकिन वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में शमी को अनदेखा किया जाना क्रिकेटफैंस के लिए आज भी एक रहस्य बना हुआ है। चाहे विराट कोहली की कप्तानी हो या फिर रोहित शर्मा की, दोनों ही कप्तानों ने इस गेंदबाज पर पूरा भरोसा नहीं जताया। शमी ने वनडे वर्ल्ड कप के 18 मैचों में 13.52 की औसत से 55 विकेट चटकाए हैं, जो भारत के किसी भी अन्य गेंदबाज से अधिक हैं। बावजूद इसके, उन्हें हमेशा प्लेइंग इलेवन में तब शामिल किया गया, जब कोई खिलाड़ी चोटिल हो गया।
शमी, जो 3 सितंबर को 35 साल के हो गए, ने अपने करियर की शुरुआत में ही बता दिया था कि वे किस स्तर के गेंदबाज हैं। अपने पहले टेस्ट मैच में 9 विकेट लेकर उन्होंने इतिहास रच दिया था। यह प्रदर्शन किसी भी भारतीय तेज गेंदबाज के लिए डेब्यू मैच में अब तक का सबसे बेहतरीन है। इसके बाद के कप्तानों ने शायद ही शमी को उनके इस प्रदर्शन का पूरा फायदा उठाने दिया।
धोनी का भरोसा और बाकी कप्तानों का संकोच
एमएस धोनी की कप्तानी में शमी ने 2015 के वर्ल्ड कप में सभी मैच खेले, लेकिन इसके बाद, चाहे वह 2019 का वर्ल्ड कप हो या 2023 का, शमी को प्लेइंग इलेवन में जगह पाने के लिए इंतजार करना पड़ा। 2019 में, जब भारत 4 मैच खेल चुका था, तभी शमी को मौका मिला। 2023 में, रोहित शर्मा ने उन्हें हार्दिक पंड्या के चोटिल होने के बाद याद किया।
रिकॉर्ड जो सब कुछ बयां करता है
शमी का रिकॉर्ड किसी भी भारतीय गेंदबाज से बेहतर है। वनडे वर्ल्ड कप में उन्होंने 18 मैचों में 55 विकेट लिए हैं, जो जहीर खान (44 विकेट), जवागल श्रीनाथ (44 विकेट), और जसप्रीत बुमराह (38 विकेट) से कहीं आगे है। लेकिन इसके बावजूद, भारतीय कप्तान शमी को नजरअंदाज करते रहे हैं।









