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भारत सरकार द्वारा आयोजित 16वें वित्त आयोग के नेशनल कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए नटवर ताम्रकार

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अहिवारा (रोहितास सिंह भुवाल)।

भारत मंडपम, प्रगति मैदान में आयोजित 16वें वित्त आयोग के नेशनल कॉन्फ्रेंस में नगर पालिका परिषद अहिवारा के अध्यक्ष नटवर ताम्रकार ने भाग लिया। यह सम्मेलन “स्ट्रेंथनिंग अर्बन लोकल गवर्नमेंट इन इंडिया” विषय पर आयोजित किया गया था, जिसकी अध्यक्षता भारत सरकार के प्रमुख आर्थिक सलाहकार डॉ. अरविंद पनागरिया ने की। इस महत्वपूर्ण मंच पर देशभर के नगर निगम और नगर पालिका परिषदों के प्रतिनिधि जुटे, जहां उन्होंने शहरी विकास और स्थानीय सरकारी संस्थाओं को मजबूत करने के लिए अपने विचार प्रस्तुत किए।

नटवर ताम्रकार के प्रमुख सुझाव

सम्मेलन के दौरान, नटवर ताम्रकार ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जो विशेष रूप से नगर पालिकाओं और शहरी क्षेत्रों में विकास को प्रोत्साहित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

  1. अनुदान राशि के वितरण में बदलाव:
    नटवर ताम्रकार ने ‘नॉन विलियम प्लस सिटी’ के अंतर्गत मिलने वाली अनुदान राशि के वितरण के अनुपात में बदलाव का प्रस्ताव रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि वर्तमान में जो 40% अनटाईल्ड ग्रांट और 60% टाईल्ड ग्रांट का अनुपात है, उसे बदलकर 50% – 50% किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे दोनों मदों में उचित वितरण होगा और नगर पालिकाओं के कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
  2. स्वच्छता और जल कार्यों के लिए समायोजन:
    नटवर ताम्रकार ने टाईल्ड ग्रांट के अंतर्गत मिलने वाली राशि में सुधार की आवश्यकता जताई। उनका सुझाव था कि 50% राशि एस डब्ल्यू एम (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) और 50% राशि वाटर वर्क्स के लिए आवंटित की जाती है। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि इस मद में एस डब्ल्यू एम अंतर्गत क्रय किए गए वाहन, उपकरण, सामग्री और स्वच्छता कार्यों में लगे कर्मचारियों की वृद्धि व उनके मानदेय में होने वाले व्यय का समायोजन किया जाए।
  3. वायु प्रदूषण घटक के लिए प्रस्ताव:
    ताम्रकार ने ‘मिलियन प्लास सिटी’ दुर्ग-भिलाई अर्बन एग्रीगेशन में अहिवारा नगर पालिका को शामिल करने का प्रस्ताव रखा, जिससे क्षेत्र में वायु प्रदूषण नियंत्रण और अन्य पर्यावरणीय मुद्दों पर बेहतर कार्य किया जा सके। उनका मानना है कि इस क्षेत्र को अर्बन एग्रीगेशन के तहत लाने से प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी और शहरी वातावरण को बेहतर बनाया जा सकेगा।
  4. स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में विशेष ध्यान:
    नटवर ताम्रकार ने 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि को स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में खर्च करने का प्रस्ताव भी रखा। उनका कहना था कि यह दोनों क्षेत्र जनकल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि शहरी क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हो सकें।
  5. आपदा प्रबंधन के लिए विशेष अनुदान की मांग:
    नटवर ताम्रकार ने आपदा प्रबंधन के तहत विशेष अनुदान की मांग की। उनका मानना था कि शहरी क्षेत्रों में आपदाओं से निपटने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है, ताकि आपदाओं के दौरान त्वरित और प्रभावी तरीके से राहत कार्य किए जा सकें।
  6. शहरी गंदी बस्तियों के विकास के लिए अनुदान:
    ताम्रकार ने शहरी गंदी बस्तियों के विकास के लिए भी विशेष अनुदान की मांग की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन बस्तियों में रहने वाले नागरिकों को बेहतर जीवन सुविधाएं मिलनी चाहिए और इसके लिए विशेष निधि आवंटित की जानी चाहिए।
  7. प्रशासकीय स्वीकृति की प्रक्रिया में सुधार:
    ताम्रकार ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं की प्रशासकीय स्वीकृति की प्रक्रिया में सुधार का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अगर नगर पालिका परिषद 21 दिनों के भीतर प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान नहीं कर पाती है, तो ऐसे मामलों में जिला कलेक्टर को प्रशासकीय स्वीकृति देने का अधिकार होना चाहिए। इससे योजनाओं की गति बढ़ेगी और समय पर कार्यों का क्रियान्वयन होगा।
  8. वित्तीय अधिकारों की आवश्यकता:
    ताम्रकार ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं के संचालन के लिए नगर पालिका अध्यक्षों और पार्षदों के पास पर्याप्त वित्तीय अधिकार होने चाहिए। यदि उन्हें वित्तीय अधिकार मिलते हैं, तो योजनाओं में अधिक पारदर्शिता आएगी और उनके कार्यों को जनता तक सही तरीके से पहुंचाया जा सकेगा।
  9. ऑनलाइन पोर्टल पर कार्यों की निगरानी:
    नटवर ताम्रकार ने यह सुझाव दिया कि सभी योजनाओं के कार्यों की निगरानी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जाए। इस पोर्टल में जियोटेगिंग फोटो के जरिए कार्यों की स्थिति को ट्रैक किया जा सकेगा, जिससे काम की गुणवत्ता की जांच करना आसान होगा। इससे आम जनता और प्रशासन दोनों को काम की प्रगति का सही पता चल सकेगा और कोई भी अनियमितता नहीं होगी।

संक्षिप्त समय सीमा में प्रशासनिक स्वीकृति
नटवर ताम्रकार ने केंद्र और राज्य शासन द्वारा प्रायोजित योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति के लिए एक समय सीमा निर्धारित करने की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि अगर परिषद प्रशासकीय स्वीकृति में देरी करती है, तो जिला कलेक्टर को इसे पूरा करने का अधिकार होना चाहिए, जिससे योजनाओं की कार्यान्वयन में कोई रुकावट न आए।

नटवर ताम्रकार के इन प्रस्तावों को सम्मेलन में गहरे विचार-विमर्श के बाद माना गया और कई प्रतिनिधियों ने उनकी पहल की सराहना की। उनका उद्देश्य शहरी स्थानीय सरकारों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना है, ताकि देश के शहरी क्षेत्रों में जनकल्याण को प्राथमिकता दी जा सके।

 

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