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रिसाली में कमिश्नर मोनिका वर्मा की पहल लाई रंग: नेवई का 10 एकड़ का डंपिंग यार्ड पूरी तरह खत्म, दुर्ग संभाग का पहला निगम जहां कोई ट्रेंचिंग ग्राउंड नहीं
(रिपोर्ट- रोहितास सिंह भुवाल)
रिसाली (ओमदर्पण न्यूज़)। रिसाली नगर निगम के सरहद नेवई में 10 एकड़ में फैला ट्रेंचिंग ग्राउंड अब इतिहास बन चुका है। निगम आयुक्त मोनिका वर्मा की मेहनत और दृढ़ संकल्प के चलते इस इलाके से उठने वाले दमघोंटू धुएं और चक्कर का एहसास कराने वाली गैस से स्थानीय लोगों को हमेशा के लिए निजात मिल गई है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एन.जी.टी.) के ट्रेंचिंग ग्राउंड में डंप कचरे के निष्पादन संबंधी आदेश का पालन करने में रिसाली निकाय पूरी तरह सफल साबित हुआ है। माना जा रहा है कि यह दुर्ग संभाग का पहला ऐसा निकाय बन गया है, जहां अब कोई ट्रेंचिंग ग्राउंड नहीं है। मार्च 2024 में आयुक्त मोनिका वर्मा ने पदभार ग्रहण करते ही 30 वर्षों से जमा हो रहे इस कचरे के पहाड़ को खत्म करने की योजना बनाई थी। अल्प समय में ही उनके अथक प्रयासों से उस स्थान की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। अब यहां से गुजरने वाले लोगों को संक्रमण के डर से मुंह पर मास्क या कपड़ा नहीं बांधना पड़ता।
इसलिए जरूरी था इसे हटाना
प्रदेश का एकमात्र स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय नेवई में ही स्थित है। विश्वविद्यालय का मुख्य द्वार इस ट्रेंचिंग ग्राउंड के मुहाने से होकर गुजरता था। यहां शोध करने वाले और पढ़ने वाले विद्यार्थियों को स्वच्छ वातावरण नहीं मिल पा रहा था। यही वजह थी कि विश्वविद्यालय प्रशासन भी इसे लेकर गंभीर था और लगातार प्रशासनिक बैठकों में इस ट्रेंचिंग ग्राउंड को खत्म करने की चर्चा होती रहती थी।
नागरिक ले रहे राहत की सांस
एक वर्ष पहले तक नेवई और आस-पास के नागरिक कचरे के धुएं और विषैली गैस से परेशान थे। शरारती तत्व अक्सर कचरे में आग लगा देते थे, जिससे इलाके में घुटन पैदा हो जाती थी। अब इस दमघोंटू धुएं से नागरिकों को पूरी तरह मुक्ति मिल चुकी है।
मिलेगा सुकून और शुद्ध वातावरण का एहसास
आने वाले समय में नेवई विश्वविद्यालय के आस-पास का क्षेत्र आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है। नेवई ट्रेंचिंग ग्राउंड समाप्त होने के बाद अब भिलाई इस्पात संयंत्र यहां लाखों की लागत से ‘मियावाकी’ (मिनी फॉरेस्ट) विकसित कर रहा है। महज 2 से 3 वर्षों में लगाए गए अलग-अलग प्रजाति के पौधे आत्मनिर्भर हो जाएंगे। जहां कभी कचरे का अंबार हुआ करता था, वहां अब आमजनों को शुद्ध वातावरण मिलेगा। यहां कृत्रिम वन के साथ-साथ ताल और पाथवे का निर्माण भी कराया जा रहा है।













