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बस्तर से गृह मंत्री अमित शाह की हुंकार: पूरा देश हुआ नक्सल मुक्त, अब विकास की बारी

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OM Darpan

May 20, 2026 02:18 pm 488 views
बस्तर से गृह मंत्री अमित शाह की हुंकार: पूरा देश हुआ नक्सल मुक्त, अब विकास की बारी

बस्तर (ओमदर्पण न्यूज़ डेस्क)।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस ऐतिहासिक अवसर पर अमित शाह ने ऐलान किया कि आज पूरा भारत और विशेषकर बस्तर नक्सल मुक्त हो चुका है। उन्होंने इस बड़ी उपलब्धि का श्रेय सुरक्षाबलों के जवानों के परिश्रम, बहादुरी और सटीक खुफिया इनपुट को दिया।

बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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नक्सल मुक्ति और विकास का नया दौर

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि बैठक बस्तर में हो रही है और बैठक से पूर्व ही पूरा बस्तर नक्सल मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि 'Whole of the Government Approach' के साथ केंद्र और राज्य सरकारों ने नक्सल मुक्त क्षेत्रों में विकास पहुंचाने का कार्य किया है। हालांकि, शाह ने स्पष्ट किया कि जब तक इन नक्सल मुक्त क्षेत्रों को विकास के मामले में देश के बाकी हिस्सों के बराबर नहीं लाया जाता, तब तक यह लड़ाई समाप्त नहीं होगी। इस ऐतिहासिक सफलता के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया और छत्तीसगढ़ सरकार के नेतृत्व की सराहना की।

विवाद मुक्त हुआ मध्य क्षेत्र, बैठकों में आई तेजी

अमित शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में क्षेत्रीय परिषदों की बैठकें संवाद से समाधान का सशक्त मंच बनी हैं। 2004 से 2014 के बीच क्षेत्रीय परिषद की मात्र 11 बैठकें हुई थीं, जबकि 2014 से 2026 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 32 हो गया है। इसी तरह चर्चित मुद्दों में 200% से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई है और 80% मुद्दों का सफल निराकरण कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि मध्य क्षेत्र (छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड) अब न केवल नक्सल मुक्त है, बल्कि केंद्र और राज्यों के बीच पूरी तरह विवाद मुक्त भी हो चुका है।

महिला सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य पर कड़े निर्देश

बैठक के दौरान अमित शाह ने कई सामाजिक और कानूनी मुद्दों पर मुख्यमंत्रियों व मुख्य सचिवों को स्पष्ट निर्देश दिए:

  • POCSO और बलात्कार: इन मामलों में समय पर DNA जांच हो ताकि शत-प्रतिशत दोषसिद्धि दर सुनिश्चित की जा सके।

  • त्वरित न्याय (2029 का लक्ष्य): जिस तरह देश को नक्सलवाद से मुक्त किया गया है, उसी तरह 2029 से पूर्व यह सुनिश्चित करना है कि हर आपराधिक मुकदमा 3 वर्ष के भीतर सुप्रीम कोर्ट तक अपने अंजाम तक पहुंचे। 5 साल से अधिक लंबित मामलों के लिए उच्च न्यायालयों को विशेष अदालतें गठित करनी चाहिए।

  • साइबर सुरक्षा: सभी चारों राज्य केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रारूप के अनुरूप '1930' साइबर सुरक्षा हेल्पलाइन के कॉल सेंटर को तुरंत अपडेट करें।

  • कुपोषण और शिक्षा: कुपोषण के विरुद्ध भारत सरकार की लड़ाई में राज्य कंधे से कंधा मिलाकर चलें। स्कूल ड्रॉपआउट दर में कमी और गुणवत्ता में सुधार पर फोकस हो।

  • मिलावटखोरी पर नकेल: मिलावटखोरी के मामलों में दर्ज केस और जुर्माने को सार्वजनिक रूप से प्रचारित किया जाए, ताकि जनता को दोषी दुकानदारों की असलियत पता चले।

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गृह मंत्री ने जल जीवन मिशन-2, वित्तीय समावेशन, और ग्रामीण विकास पर 50% ध्यान केंद्रित करने की अपील करते हुए कहा कि हर 5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराना DBT योजनाओं की सफलता के लिए अनिवार्य है।

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