24 सितम्बर 2026 |
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सेवा संकल्प से बदली कौशिया निषाद की जिंदगी, बनीं लखपति दीदी

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OM Darpan

Sep 25, 2026 03:37 am 370 views
सेवा संकल्प से बदली कौशिया निषाद की जिंदगी, बनीं लखपति दीदी

स्व-सहायता समूह से मिला सहारा, फैंसी स्टोर, कपड़ा, पार्लर और पोल्ट्री से सालाना करीब दो लाख रुपये का शुद्ध लाभ

दुर्ग। समाज की अंतिम पंक्ति में खड़ी महिलाओं को स्वावलंबी और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में सेवा संकल्प ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार कर रहा है। शासकीय योजनाओं और स्व-सहायता समूहों से मिलने वाली सहायता के जरिए महिलाएं अपने हुनर को आय के साधन में बदल रही हैं।

इसी कड़ी में दुर्ग जिले के जनपद पंचायत पाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत सिपकोहा की श्रीमती कौशिया निषाद ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह बनाई है। कभी परिवार के साथ खेतिहर कार्यों में हाथ बंटाने वाली कौशिया अब अलग-अलग व्यावसायिक गतिविधियों से प्रतिवर्ष करीब दो लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर रही हैं।

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स्व-सहायता समूह से मिला आगे बढ़ने का रास्ता

कौशिया निषाद ने बताया कि पहले वे एक साधारण गृहिणी के रूप में खेतिहर कार्यों में परिवार का सहयोग करती थीं। सेवा संकल्प की मंशा के अनुरूप वे ‘बाला मां महिला स्व-सहायता समूह’ से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्हें आजीविका बढ़ाने के लिए वित्तीय सहयोग के साथ मार्गदर्शन भी मिला।

समूह के जरिए 15 हजार रुपये की आरएफ और 60 हजार रुपये की सीआईएफ राशि के साथ बैंक ऋण की सहायता मिलने पर कौशिया ने फैंसी स्टोर, कपड़ा और पार्लर का व्यवसाय शुरू किया।

मुर्गी शेड से बढ़ाया आजीविका का दायरा

कौशिया ने अपनी आजीविका को केवल एक व्यवसाय तक सीमित नहीं रखा। बाड़ी विकास योजना और मनरेगा के तहत स्वीकृत 1.20 लाख रुपये की सहायता से मुर्गी शेड का निर्माण कराया। इसके बाद उन्होंने पशुपालन और पोल्ट्री गतिविधियों को भी अपनी आजीविका से जोड़ लिया।

प्रशासनिक सहयोग, अलग-अलग वित्तीय सुविधाओं और अपनी मेहनत के बल पर कौशिया निषाद आज विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों से प्रतिवर्ष लगभग दो लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमा रही हैं।

गृहिणी से बनीं ‘लखपति दीदी’

एक साधारण गृहिणी से सफल उद्यमी बनने तक का सफर तय कर कौशिया निषाद अब ‘लखपति दीदी’ के रूप में उभरी हैं। अपनी मेहनत और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ समाज में अपनी अलग पहचान भी बनाई है।


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