सदभावना वृद्धाश्रम राजकोट: 5000 बुजुर्गों का सहारा बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा मुफ्त वृद्धाश्रम
OM Darpan
May 24, 2026 10:45 pm
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24 May 2026
राजकोट/मुंबई।
“जब परिवार साथ छोड़ देता है, तब सबसे ज़्यादा ज़रूरत सम्मान और अपनापन की होती है।” इसी भावना के साथ काम कर रहा गुजरात के राजकोट स्थित ‘विनुभाई बचुभाई नागरेचा परिसर’ (सदभावना वृद्धाश्रम) अब बेसहारा बुजुर्गों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभर रहा है। यह संस्था 500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक नया परिसर तैयार कर रही है, जो दुनिया के सबसे बड़े निःशुल्क वृद्धाश्रमों में शुमार होगा। इस नए परिसर में 5000 जरूरतमंद बुजुर्गों के रहने की मुकम्मल व्यवस्था होगी। संस्था से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल आश्रय देना नहीं है, बल्कि बेसहारा, बीमार और बिस्तर पर पड़े बुजुर्गों को उनके परिवार जैसा स्नेह और सम्मान देना है। संस्था का प्रयास है कि जीवन के अंतिम पड़ाव में कोई भी बुजुर्ग अकेलापन या उपेक्षा महसूस न करे।10 वर्षों से हो रही निःस्वार्थ सेवा
संस्था के अनुसार, पिछले दस वर्षों से यहां निःसंतान, दिव्यांग, कैंसर और कोमा जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्गों की पूरी तरह से निःशुल्क सेवा की जा रही है। वर्तमान में इस वृद्धाश्रम में 700 से अधिक बुजुर्ग निवास कर रहे हैं। इनमें एक बड़ी संख्या उन मरीजों की है, जो पूरी तरह से बिस्तर पर पड़े हैं और जिन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।मिल रही हैं ये आधुनिक सुविधाएं
बुजुर्गों की सेहत और मानसिक शांति को ध्यान में रखते हुए इस वृद्धाश्रम में 24 घंटे मेडिकल सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा फिजियोथेरेपी सेंटर, सत्संग हॉल, मंदिर, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की जगह और आधुनिक रहने की व्यवस्था मुहैया कराई जा रही है। संस्था का मानना है कि बुजुर्गों को केवल दवाओं की नहीं, बल्कि संवाद, सम्मान और भावनात्मक सहारे की भी सबसे ज्यादा जरूरत होती है।संस्था की आम जन से अपील
सदभावना वृद्धाश्रम ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास कोई भी बेसहारा, बीमार या लाचार बुजुर्ग दिखाई दे, तो उन्हें इस वृद्धाश्रम तक पहुंचाने में अपना सहयोग जरूर दें, ताकि उन्हें एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सके। समाज के अंतिम छोर तक मदद पहुंचाने की यही भावना जनहितैषी योजनाओं और सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाती है।
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