नई दिल्ली।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व पर उठे सवालों के बीच विपक्षी इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों की ओर से समर्थन मिल रहा है। पहले समाजवादी पार्टी और अब शरद पवार ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में विश्वास जताया है। शरद पवार ने कहा, “वह इस देश की एक प्रमुख नेता हैं। उनमें नेतृत्व करने की क्षमता है। उनके द्वारा चुने गए नेता जिम्मेदार और जागरूक हैं, इसलिए उन्हें इस गठबंधन का नेतृत्व करने का अधिकार है।”
शुक्रवार को एक समाचार चैनल से बात करते हुए ममता बनर्जी ने गठबंधन के नेतृत्व और समन्वय को लेकर अपनी निराशा व्यक्त की। ममता ने कहा, “मैंने इंडिया ब्लॉक का गठन किया था, अब इसका प्रबंधन उन लोगों पर निर्भर है जो इसका नेतृत्व कर रहे हैं। अगर वे इसे नहीं चला सकते, तो मैं क्या कर सकती हूं? मुझे बस यह कहना है कि सभी को एकजुट होकर चलने की जरूरत है।”
विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए में समय के साथ दरारें फैलने लगी हैं। इसके कई घटक दलों के बीच मतभेद और कांग्रेस द्वारा आत्मनिरीक्षण की मांग उठ रही है। अदाणी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस को अपने अन्य सहयोगियों से अलग देखा गया। संसद के भीतर और बाहर भी आइएनडीआइए के घटक दलों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं।
विशेषकर हरियाणा और महाराष्ट्र में कांग्रेस की करारी हार के बाद अन्य पार्टियां भी गठबंधन के भीतर अपनी ताकत दिखाने लगी हैं। ममता बनर्जी ने इस बारे में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अगर उन्हें नेतृत्व का मौका मिलता है तो वह इसे बंगाल से भी चला सकती हैं। उन्होंने कहा, “मैं बंगाल की मिट्टी छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहती। मेरा जन्म यहीं हुआ है और यहीं अंतिम सांस लूंगी।”
सपा के राज्यसभा सदस्य जावेद अली खान ने कहा कि उनकी पार्टी अब भी आइएनडीआइए का हिस्सा है, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि गठबंधन में मतभेद मौजूद हैं। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “विपक्षी गठबंधन के सभी घटक दलों के नेता तय करेंगे कि उनका नेतृत्व कौन करेगा।”
कांग्रेस ने ममता बनर्जी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बंगाल कांग्रेस के प्रवक्ता सौम्य राय आइच ने कहा, “कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियां भाजपा के खिलाफ पूरे भारत में लड़ रही हैं, जबकि ममता का भाजपा विरोध सीजनल पॉलिटिक्स जैसा है।”
भा.ज.पा के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, “राहुल और प्रियंका गांधी वाड्रा को उनके गठबंधन के नेता गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, तो देश की जनता उन्हें कैसे गंभीरता से ले सकती है?”
इस बीच, ममता बनर्जी ने तृणमूल में अंतर्द्वंद्व को देखते हुए जनवरी में पार्टी का विशेष अधिवेशन बुलाने की योजना बनाई है, जिसमें पार्टी के समस्त सांसद, मंत्री-विधायक, नगर निकायों और पंचायतों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस अधिवेशन में ममता अंतर्द्वंद्व पर काबू पाने के लिए कई बड़े फैसले ले सकती हैं। साथ ही, बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए कार्यसूची भी घोषित की जा सकती है।







