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शिक्षा का मंदिर या शराबियों का अड्डा?

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  • 484 छात्रों के भविष्य से  हो रहा खिलवाड़

  • ननकट्ठी स्कूल की दर्दनाक हकीकत 

ननकट्ठी (रोहितास सिंह भुवाल)।

जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, ननकट्ठी की तस्वीरें किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोर कर रख देंगी। यह वो सवाल खड़ा करती हैं कि क्या शिक्षा वाकई हमारी प्राथमिकता है? जिस जगह को ज्ञान का मंदिर होना चाहिए था, वो आज उपेक्षा, अव्यवस्था और असामाजिक तत्वों की गिरफ्त में कराह रहा है। 484 विद्यार्थियों का भविष्य यहां दांव पर लगा है, लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं।

 

शिक्षकों की भारी कमी, कैसे पढ़ेंगे 484 विद्यार्थी?

 

विद्यालय में शिक्षा की रीढ़ ही टूट चुकी है। प्राचार्य का महत्वपूर्ण पद खाली पड़ा है। स्वीकृत 11 व्याख्याताओं के पदों के विरुद्ध केवल 9 ही कार्यरत हैं, जिनमें राजनीति विज्ञान और हिन्दी जैसे अनिवार्य विषयों के लिए कोई शिक्षक ही नहीं है। इतना ही नहीं, 2 सहायक शिक्षक, 1 ग्रंथपाल, 4 भृत्य और 1 चौकीदार के पद भी धूल फांक रहे हैं। विडंबना देखिए कि युक्तिकरण के नाम पर समाधान करने के बजाय, यहां से एक कॉमर्स के शिक्षक को भी अन्यत्र भेज दिया गया, जिससे व्यवस्था और चरमरा गई है।

 

 

खंडहर बने शौचालय, छात्राओं की बढ़ी मुसीबत

स्वच्छता और सम्मान की बातें यहां आकर दम तोड़ देती हैं। साल 2021-22 में बालिकाओं के लिए 2 लाख रुपये की लागत से बना शौचालय आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। नलों में पानी नहीं है, टोटियां टूटी पड़ी हैं। बालकों के शौचालय की स्थिति तो और भी भयावह है, जहाँ टूटे दरवाजे और असहनीय बदबू का साम्राज्य है। डर के कारण बच्चे इसका उपयोग करने से कतराते हैं, और यह शौचालय अब एक खंडहर में तब्दील हो चुका है।

 

विद्यालय परिसर बना असामाजिक तत्वों का अड्डा

जब ज्ञान के केंद्र असुरक्षित हो जाएं, तो भविष्य की कल्पना सहज ही की जा सकती है। छुट्टी के दिनों, खासकर रविवार को, विद्यालय का मंच असामाजिक तत्वों का ‘पार्टी प्वाइंट’ बन जाता है। यहाँ खुलेआम शराबखोरी होती है, बोतलें फोड़ी जाती हैं और हर तरफ गंदगी का अंबार लगा दिया जाता है। इस दबंगई का आलम यह है कि प्रबंधन द्वारा लगाए गए तीन सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ दिए गए, जिससे निगरानी की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई।

 

हरियाली का सपना भी टूटा, 75 पौधे भी नहीं बचा सके

विद्यालय की बदहाली का असर पर्यावरण पर भी पड़ा है। मनरेगा के तहत लगाए गए 75 पौधे और उनके ट्री गार्ड आज गायब हैं। ग्राम पंचायत हर साल पौधारोपण का दावा करती है, लेकिन पिछले वर्ष लगाए गए पौधों में से एक भी जीवित नहीं बचा। या तो ट्री गार्ड चोरी हो गए या तोड़ दिए गए। परिसर में व्यवस्थित दरवाजे न होने के कारण जानवर बेरोक-टोक घूमते हैं, जो बचे-खुचे पौधों को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

 

एक मैदान, चार स्कूल, पर सुरक्षा शून्य

ननकट्ठी का यह परिसर अपने आप में एक अनूठी लापरवाही का उदाहरण है। यहाँ शासकीय प्राथमिक शाला, पूर्व माध्यमिक शाला, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और एक बंद हो चुका अर्द्धशासकीय विद्यालय स्थित हैं। लेकिन इस विशाल परिसर में प्रवेश के लिए 4-5 रास्ते खुले हैं, न कोई गेट है, न कोई निगरानी। कोई भी, कभी भी बेधड़क अंदर आ-जा सकता है।

 

समाज में आक्रोश, प्रशासन मौन

विद्यालय की इस दुर्दशा को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज के लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि “अब बहुत हो चुका।” उन्होंने तत्काल प्राचार्य, विषय-शिक्षकों, भृत्य और सुरक्षाकर्मियों की नियुक्ति की मांग की है। साथ ही, परिसर की मरम्मत और इसे असामाजिक तत्वों से मुक्त कराने की भी पुरजोर मांग उठाई है। लेकिन शिक्षा विभाग और प्रशासन की चुप्पी उनकी असंवेदनशीलता को ही दर्शा रही है, जिससे 484 बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता दिख रहा है।


 

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