दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।
भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग में आज संविधान दिवस के अवसर पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों को भारतीय संविधान की महत्ता और उद्देशिका के बारे में जागरूक करना था। कार्यशाला में विभिन्न विद्वानों और विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. टी. आर. डेहरे, सेवानिवृत्त प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय उदयपुर और विजिटिंग प्रोफेसर, भूगोल विभाग ने संविधान अंगीकरण के बाद के भौगोलिक परिदृश्य में संविधान की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने सतत विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया और वर्तमान भारतीय समाज के समक्ष इससे संबंधित चुनौतियों को बताया।
इसके बाद डॉ. अरविंद शुक्ला, सेवानिवृत्त प्राचार्य, ओ. पी. शर्मा महाविद्यालय, डबरा, चंद्रपुर और विजिटिंग प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग ने संविधान की उद्देशिका की व्याख्या की। उन्होंने संविधान की सफलता और उपादेयता का प्रमुख आधार संविधान द्वारा अंतिम व्यक्ति तक अपने लाभ पहुंचाने को बताया।
डॉ. आर. पी. अग्रवाल, सेवानिवृत्त प्राचार्य, कल्याण स्नाकोत्तर महाविद्यालय भिलाई नगर और राष्ट्रीय सेवा योजना संयोजक, हेमचंद विश्वविद्यालय, दुर्ग ने विद्यार्थियों को नैतिक विकास के महत्व को समझाते हुए भारत की धार्मिक और आध्यात्मिक धरोहर को आत्मसात करने का आह्वान किया।
कार्यशाला में डॉ. आलोक भट्ट, अकादमिक अध्यक्ष ने छात्रों को संविधान के अक्षरशः पालन और इसे मजबूत बनाने की प्रेरणा दी। वहीं, डॉ. आर. एन. सिंह, प्रति-कुलपति ने संविधान में उल्लिखित मौलिक कर्तव्यों का पालन करते हुए समर्पण और निष्ठा से संविधान का पालन करने की सीख दी।
कार्यक्रम के अंत में, डॉ. स्नेह कुमार मेश्राम, राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी एवं गोदग्राम समन्वयक ने सभी विद्यार्थियों को संविधान की उद्देशिका की शपथ दिलाई।
इस आयोजन में आस्था चतुर्वेदी, सम्पदा बैस, डॉ. निमिषा मिश्रा, श्वेता सिंह, निशा पटेल, डॉ. नीना सिंह, श्वेता कुमारी, डॉ. भूमिका मिश्रा, डॉ. निशा गोस्वामी, डॉ. कृष्णदत्त त्रिपाठी, डॉ. अजय सिंह, रॉलीक दास, अखिलेश सेन सहित अन्य प्राध्यापक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हुए।
यह कार्यक्रम विधि संकाय और राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के संयुक्त तत्वाधान में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।







