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पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 83% घटीं, मोगा का रणसिंह कलां गांव बनेगा देश का रोल मॉडल

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  • कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का एलान- धान-गेहूं के साथ दलहन की भी एमएसपी पर होगी खरीद

  • 5 साल की कृषि योजना के लिए किसानों के साथ करेंगे मंथन

मोगा (पंजाब).

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को पंजाब के मोगा जिले का दौरा किया। यहां रणसिंह कलां गांव में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने दावा किया कि पंजाब में इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में भारी कमी आई है। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में पराली जलाने के मामले 83 प्रतिशत तक घट गए हैं। जहां पहले लगभग 83 हजार घटनाएं होती थीं, वहीं अब यह संख्या सिमट कर 5 हजार के करीब रह गई है।

चौहान ने रणसिंह कलां गांव को पराली प्रबंधन के लिए एक आदर्श उदाहरण बताते हुए इसे पूरे देश में बतौर ‘मॉडल’ प्रस्तुत करने की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और गेहूं-धान के साथ-साथ अब मसूर, तूअर, उड़द और चना भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदा जाएगा।

रणसिंह कलां: जहां 6 साल से नहीं जली एक भी तीली

कृषि मंत्री ने रणसिंह कलां गांव की पंचायत और किसानों की सराहना करते हुए कहा कि यहां पिछले 6 वर्षों से पराली नहीं जलाई गई है। ग्रामीणों ने पराली को बोझ नहीं, बल्कि वरदान माना है। उन्होंने कहा, “मैं यहां पंजाब को बधाई देने और इस मॉडल को पूरे देश में ले जाने आया हूं। यह गांव ज्ञान की पाठशाला है।” गांव के दौरे के दौरान उन्होंने देखा कि कैसे किसान पराली को खेत में मिलाकर हैप्पी सीडर तकनीक और डायरेक्ट सीडिंग का उपयोग कर रहे हैं।

खेती की लागत घटी, मुनाफा बढ़ा

किसानों से संवाद के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पराली को खेत में मिलाने से न केवल प्रदूषण कम हुआ है, बल्कि खेती की लागत भी घटी है।

  • खाद की बचत: जहां पहले डेढ़ गट्टा डीएपी लगता था, अब एक ही लगता है। यूरिया की खपत 3 गट्टों से घटकर 2 रह गई है।

  • पानी की बचत: पराली के कारण जमीन में नमी बनी रहती है, जिससे सिंचाई की कम आवश्यकता होती है।

  • उत्पादन: प्रति एकड़ 20 से 22 क्विंटल उत्पादन हो रहा है। आलू और सरसों की फसल में भी गुणवत्ता सुधरी है और जिंक-पोटाश की अलग से जरूरत नहीं पड़ रही।

दिसंबर में बनेगा 5 साल का रोडमैप

शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि आगामी 22-23 दिसंबर को एक ‘चिंतन बैठक’ का आयोजन किया जाएगा। इसमें देश के चुनिंदा किसानों के साथ बैठकर अगले 5 साल के लिए कृषि योजनाओं का रोडमैप तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में खेती में बदलाव और किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाएं बनाई जाएंगी।

छोटे किसानों के लिए ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’

मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए कृषि मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) को निर्देश दिया कि कस्टम हायरिंग सेंटर्स को ‘मैकेनाइजेशन सेंटर’ के रूप में विकसित किया जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटे किसान, जो महंगी मशीनें नहीं खरीद सकते, वे समूह के माध्यम से या किराए पर मशीनें लेकर खेती कर सकें।

गांव में विकास के अन्य आयाम

कृषि मंत्री ने गांव में चल रहे अन्य विकास कार्यों का भी निरीक्षण किया। रणसिंह कलां में अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम के चलते डेंगू और मलेरिया की समस्या खत्म हो गई है। इसके अलावा रेन वाटर हार्वेस्टिंग, प्लास्टिक प्रबंधन, लाइब्रेरी और नशामुक्ति अभियान जैसे कार्यों के लिए उन्होंने सरपंच प्रीत इंदरपाल सिंह मिंटू की पीठ थपथपाई।

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