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बिल पास करने के नाम पर मांगे थे 1.90 लाख
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एसीबी ने 40 हजार लेते रंगे हाथों दबोचा
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विशेष न्यायालय ने लिया फैसला
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बाइक खरीदने के लिए मांगी थी घूस
जशपुर.
भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए जशपुर के विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किए गए श्रम निरीक्षक सुरेश कुर्रे को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी अधिकारी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश ने बुधवार, 26 नवंबर 2025 को सुनाया।
प्रशिक्षण के बिल भुगतान में फंसाया था पेंच
मामला वर्ष 2019 का है। अभियोजन के अनुसार, ग्राम बूढ़ाडांड़ बगीचा निवासी रमेश कुमार यादव की संस्था ‘छत्तीसगढ़ अभिनन्दन एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी’ ने 320 युवाओं को मेशन जनरल और असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण दिया था। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद संस्था ने 6 लाख 37 हजार रुपये का बिल भुगतान के लिए विभाग में प्रस्तुत किया था। तत्कालीन श्रम निरीक्षक सुरेश कुर्रे ने बिल पास करने और चेक पर हस्ताक्षर करवाने के एवज में रिश्वत की मांग की।
जावा बाइक के लिए बढ़ा दी थी डिमांड
शिकायतकर्ता रमेश कुमार यादव के मुताबिक, श्रम निरीक्षक ने शुरुआत में 1 लाख रुपये की मांग की थी। बाद में आरोपी अधिकारी ने अपनी मांग बढ़ाकर 1 लाख 90 हजार रुपये कर दी। सुरेश कुर्रे ने तर्क दिया था कि उसे ‘जावा मोटरसायकल’ खरीदनी है, इसलिए उसे यह रकम चाहिए। परेशान होकर रमेश कुमार ने 26 सितंबर 2019 को बिलासपुर स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में शिकायत दर्ज कराई।
एसीबी ने बिछाया जाल, कार्यालय में हुई गिरफ्तारी
एसीबी ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद 14 अक्टूबर 2019 को ट्रैप आयोजित किया। योजना के तहत प्रार्थी रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 40,000 रुपये लेकर श्रम निरीक्षक के पास पहुंचा। जैसे ही सुरेश कुर्रे ने अपने कार्यालय में रिश्वत की रकम थामी, एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया और 26 जून 2020 को अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया।
जुर्माना नहीं चुकाने पर भुगतनी होगी अतिरिक्त जेल
विशेष न्यायालय ने सबूतों और गवाहों के आधार पर सुरेश कुर्रे को दोषी करार दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी 50,000 रुपये का अर्थदंड नहीं चुकाता है, तो उसे छह महीने के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। फैसले के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि सरकारी पद का दुरुपयोग और रिश्वतखोरी समाज व प्रशासन के लिए घातक है, इसलिए ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती।






