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UGC नियमों पर देशभर में उबाल, भाजपा सांसदों और विधायकों ने भी खोला मोर्चा; बगावत के सुर तेज।
नई दिल्ली/रायपुर:
देश में यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर पिछले 48 घंटों में जो मंजर देखने को मिला है, उसने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रीय मीडिया से लेकर ज़मीनी स्तर तक विरोध की लहर इतनी तेज हो चुकी है कि अब इसे संभालना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
मुद्दे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंजना ओम कश्यप और रजत शर्मा जैसे देश के दिग्गज पत्रकारों ने अपने कार्यक्रमों में सरकार के सामने तीखे सवाल दागे हैं। नेशनल चैनलों पर लगातार हो रही डिबेट्स और कवरेज ने इस विरोध को घर-घर तक पहुँचा दिया है, जिससे जनमत पूरी तरह से नियमों के खिलाफ खड़ा नजर आ रहा है।
अपनों ने ही दिखाई आंखें: भाजपा नेताओं ने छोड़ी पार्टी
हैरानी की बात यह है कि विरोध सिर्फ विपक्ष तक सीमित नहीं है। भाजपा सांसद मनन मिश्रा सहित कई विधायकों ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई जगहों पर भाजपा नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है, वहीं एक अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा देकर विरोध दर्ज कराया है। कई क्षेत्रों में लोगों ने अपने घरों से भाजपा के झंडे तक हटा दिए हैं।
खिलाड़ी, पूर्व सैनिक और युवा भी मैदान में
इस विरोध प्रदर्शन में अब देश का मान बढ़ाने वाले चेहरे भी शामिल हो गए हैं। ओलंपियन विजेंद्र सिंह और योगेश्वर दत्त जैसे बड़े नामों ने खुलकर नियमों का विरोध किया है। इनके साथ ही पूर्व सैनिकों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कॉलेजों में छात्रों का प्रदर्शन जारी है, वहीं छात्राओं ने सोशल मीडिया पर इस नीति के खिलाफ एक बड़ी मुहिम छेड़ दी है।
वरिष्ठ वकीलों ने भी इन नियमों की वैधानिकता पर कड़े सवाल उठाए हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या इतने व्यापक और चहुंओर विरोध के बाद भी सरकार अपनी जिद पर अड़ी रहेगी या इन नियमों पर दोबारा विचार करने का साहस दिखाएगी?






