रतनपुर ।
उत्कृष्ट ब्राह्मण सामाजिक संगठन ‘समग्र ब्राह्मण परिषद् छत्तीसगढ़’ की बिलासपुर मातृशक्ति परिषद् इकाई द्वारा गुरुवार (19 फरवरी) को महामाया देवी की नगरी रतनपुर में 31 ब्राह्मण बटुकों का सामूहिक उपनयन संस्कार हर्षोल्लास के साथ संपन्न कराया गया। मंदिर परिसर के श्री सत्संग मंडप में आयोजित इस एक दिवसीय प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में वैदिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चार के बीच बटुकों को जनेऊ धारण करवाया गया।
अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है जनेऊ
समग्र ब्राह्मण मातृशक्ति परिषद् बिलासपुर की जिलाध्यक्ष श्रीमती रमा दीवान एवं जिला सचिव श्रीमती अंजू शर्मा ने बताया कि संगठन की जिला इकाई द्वारा रतनपुर में यह पहला सामूहिक आयोजन है। सनातन धर्म के सोलह संस्कारों में उपनयन (जनेऊ) संस्कार का दसवां स्थान है। इसका शाब्दिक अर्थ स्वयं को अंधकार से दूर रखकर प्रकाश की ओर बढ़ना है। जनेऊ धारण करने से व्यक्ति बुरे कर्मों से दूर रहता है और उसे यज्ञ व स्वाध्याय का अधिकार प्राप्त होता है।
मुंडन के बाद हुआ अष्ट ब्राह्मण भोज, बटुकों ने मांगी भिक्षा
आचार्यों के निर्देशन में मंडप में देवी-देवताओं के पूजन के पश्चात वैदिक परंपरानुसार तेलमाटी, मंडपाच्छादन, हरिद्रालेपन, चिकट और मातृका पूजन हुआ। इसके बाद सभी 31 बटुकों का मुंडन कराया गया। स्नान के बाद बटुकों ने आठ ब्राह्मणों के साथ भोजन कर ‘अष्ट ब्राह्मण भोज’ की विधि पूरी की। आचार्यों ने पलाश दंड पकड़े बटुकों को जनेऊ धारण करवाकर भगवान सूर्यनारायण का दर्शन करवाया और कान में गायत्री मंत्र की दीक्षा दी। शिक्षा ग्रहण करने के बाद बटुकों ने उपस्थित स्वजनों से “भवति भिक्षां देहि” कहकर भिक्षा मांगी।
गाजे-बाजे और आतिशबाजी के साथ निकली बारात
संस्कार संपन्न होने के बाद सभी बटुकों ने नए वस्त्र धारण किए। इसके बाद मंदिर परिसर में ही गाजे-बाजे और आतिशबाजी के साथ उनकी भव्य बारात निकाली गई। इस दौरान पूजा में बटुकों के प्रतिनिधि यजमान के रूप में श्रीमती शशि द्विवेदी एवं पं. राघवेन्द्र द्विवेदी ने पूजन प्रक्रिया पूरी की।
नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने की पहल
संगठन की प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती प्रमिला तिवारी एवं प्रदेश सचिव सजल तिवारी ने बताया कि सनातन धर्म में दिशाहीन जीवन को दिशा देना ही दीक्षा है। इसका उद्देश्य समाज में सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण और नई पीढ़ी को नैतिक मूल्यों से जोड़ना है।
मातृशक्ति परिषद् की प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती सरोज तिवारी एवं प्रदेश संगठन विस्तार प्रमुख श्रीमती उमा शुक्ला ने बताया कि यह “उपनयन संस्कार” का पहला सफल वर्ष है। इसमें रायपुर, अंबिकापुर, पेंड्रा, जांजगीर-चांपा, सक्ती, कोरबा और बलौदाबाजार सहित विभिन्न जिलों से आए बटुकों का उपनयन हुआ।
संस्कार विधि को आचार्य पं. दुर्गा शंकर दुबे, पं. कपिल देव पांडेय, आचार्य डॉ. राजेन्द्र कृष्ण पांडेय, पं. दीपक दुबे और पं. महेन्द्र पांडेय सहित आठ ब्राह्मणों ने संपन्न कराया।
मंच संचालन मुख्य सलाहकार डॉ. भावेश शुक्ला “पराशर”, श्रीमती श्वेता शर्मा और पं. श्रीकांत तिवारी ने किया। आयोजन को सफल बनाने में श्रीमती विभा पांडेय, श्रीमती राही दुबे, श्रीमती सरिता तिवारी, श्रीमती माया दुबे, श्रीमती वंदना शर्मा, श्रीमती स्वाति दीवान, श्रीमती चंद्रकांता गौराहा, श्रीमती भगवती दुबे, श्रीमती नंदिनी तिवारी, श्रीमती किरण शर्मा, श्रीमती उर्वशी शर्मा, श्रीमती शकुंतला शर्मा, श्रीमती प्रीति पांडेय, श्रीमती पुष्पा दुबे, श्रीमती प्रियंका दुबे, पं. नीरज मिश्रा, पं. कृष्णा पांडेय, क्रांति अग्रवाल, मुकेश दुबे, देवेन्द्र शर्मा, दिलीप अग्रवाल, कैलाश पटेल, मदन यदु, राजेश ठाकुर और चेतन धीवर का विशेष सहयोग रहा।
सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक चले इस आयोजन में श्रीमती कालिंदी उपाध्याय, श्रीमती खुशबू शर्मा, श्रीमती संध्या उपाध्याय, श्रीमती प्रीति तिवारी और पं. गौरव मिश्रा सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के संगठन प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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