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तिहाड़ जेल के भीतर निजी दुकान खोलने पर पाबंदी, जानें क्या है वेंडर बनने और कैंटीन संचालन की आधिकारिक प्रक्रिया

तिहाड़ जेल कैंटीन निजी दुकान पर पाबंदी और वेंडर टेंडर प्रक्रिया

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तिहाड़ जेल कैंटीन निजी दुकान पर पाबंदी और वेंडर टेंडर प्रक्रिया

 

  • तिहाड़ जेल में निजी व्यवसायियों को दुकान खोलने की अनुमति नहीं, दिल्ली जेल विभाग ही करता है कैंटीन का संचालन।

  • कैदी जेल के भीतर नकद लेनदेन के बजाय केवल स्मार्ट कार्ड और टोकन से ही कर सकते हैं खरीदारी।

 

नई दिल्ली।

देश की सबसे हाई-प्रोफाइल जेलों में शुमार तिहाड़ जेल में कैदियों की जिंदगी और वहां की आंतरिक व्यवस्था को लेकर आम जनता में सदैव उत्सुकता बनी रहती है। जेल के भीतर हजारों कैदियों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए तिहाड़ जेल कैंटीन संचालित की जाती है। हालांकि, सुरक्षा कारणों और सरकारी नियमों के चलते तिहाड़ जेल के भीतर किसी भी आम नागरिक या निजी व्यवसायी को अपनी व्यावसायिक कैंटीन या निजी दुकान खोलने की अनुमति नहीं है। जेल प्रशासन बाहरी व्यक्तियों को परिसर के भीतर सीधे तौर पर दुकानदारी करने की इजाजत नहीं देता और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार के पास सुरक्षित है।

दिल्ली जेल विभाग के अधीन है कैंटीन व्यवस्था

तिहाड़ जेल के भीतर संचालित होने वाली कैंटीन और वहां होने वाली बिक्री का पूरा जिम्मा दिल्ली जेल विभाग के पास है। यह व्यवस्था कैदियों के सुधार और उनके पुनर्वास कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जेल के भीतर स्थित फैक्ट्रियों में सजा काट रहे कैदी स्वयं बेकरी उत्पाद, बिस्कुट, नमकीन, सरसों का तेल और फिनाइल जैसी वस्तुओं का निर्माण करते हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से कैदियों को न केवल रोजगार मिलता है, बल्कि वे विभिन्न व्यावसायिक हुनर भी सीखते हैं।

वेंडर के रूप में जुड़ने की टेंडर प्रक्रिया

यदि कोई बाहरी व्यवसायी जेल विभाग के साथ व्यापार करना चाहता है, तो उसके लिए सरकारी टेंडर की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। जेल फैक्ट्रियों के लिए कच्चा माल, बेकरी सामग्री या पैकेज्ड फूड सप्लाई करने हेतु दिल्ली जेल विभाग समय-समय पर अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ई-टेंडर और सर्कुलर जारी करता है। इच्छुक कारोबारियों को ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर वेंडर के रूप में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। केवल पंजीकृत और अर्हता प्राप्त ठेकेदार ही इस टेंडर प्रक्रिया में बोली लगा सकते हैं। दस्तावेजों के सत्यापन और जेल प्रशासन की शर्तों को पूरा करने के बाद ही सामान आपूर्ति का ठेका दिया जाता है, लेकिन दुकान का स्वामित्व हमेशा जेल प्रशासन के पास ही रहता है।

नकद लेनदेन पर पाबंदी, टोकन से होती है खरीदारी

जेल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए पैसों के लेनदेन का तरीका सामान्य बाजार से पूरी तरह भिन्न है। तिहाड़ जेल में कोई भी कैदी भारतीय रुपये या किसी भी प्रकार का नकद लेनदेन नहीं कर सकता है। जेल परिसर में नकद या यूपीआई भुगतान की अनुमति नहीं है। कैदियों को कैंटीन से सामान खरीदने के लिए विशेष स्मार्ट कार्ड या टोकन की सुविधा प्रदान की जाती है। कैदी इन्हीं टोकन का उपयोग करके जेल के भीतर आवश्यक वस्तुएं प्राप्त कर सकते हैं।

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