रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद की चुनौती से आगे बढ़कर विकास, सुशासन और निवेश के नए दौर में पहुंच गया है। रायपुर में आयोजित ‘एलटी एक्सचेंज’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 की यात्रा में छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य बनेगा।
साय ने बताया कि वर्ष 2023 में सरकार बनने के समय देश के कुल नक्सलवाद का 75 प्रतिशत हिस्सा छत्तीसगढ़ में था। केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार ने नई रणनीति और बेहतर समन्वय के साथ निर्णायक अभियान शुरू किया, जिससे अब तस्वीर बदल रही है।
बस्तर के विकास के लिए ‘नियद नेल्लानार’ योजना के तहत सुरक्षा कैंपों के आसपास बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। नक्सल हिंसा के कारण बंद हुए स्कूलों को दोबारा खोला गया है और अब सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।
दंतेवाड़ा की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित की जाएगी। गीदम में मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति दी गई है। आदिवासी बच्चों को उनकी मातृभाषा गोंडी और हल्बी में शिक्षा देने की व्यवस्था की गई है। इंद्रावती नदी पर देऊरगांव और मटनार परियोजनाओं से 80 हजार एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।
प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 11 लाख का निर्माण पूरा हो चुका है। वर्तमान में राज्य में प्रतिदिन औसतन 1600 आवास बनाए जा रहे हैं। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल मिल रहा है और अब तक 31 किश्तों की राशि दी जा चुकी है।
सवा आठ लाख करोड़ का निवेश
नई औद्योगिक नीति के चलते राज्य को सवा आठ लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। नवा रायपुर में 100 एकड़ में मेडिसिटी और प्रदेश में सेमीकंडक्टर प्लांट जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो गया है। सुशासन के लिए देश का पहला ‘सुशासन एवं अभिसरण विभाग’ छत्तीसगढ़ में बनाया गया है।
भविष्य की जरूरतों के लिए एआई मिशन के तहत 6 लाख छात्रों और डेढ़ लाख कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है। ई-फाइल प्रणाली लागू कर शासकीय प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाया गया है।
धर्मांतरण पर कठोर कानून
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गरीबी या अशिक्षा का लाभ उठाकर धर्मांतरण कराने वालों के खिलाफ राज्य सरकार ने कठोर प्रावधान किए हैं। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक के सामाजिक और सांस्कृतिक हितों की रक्षा करना है। विकसित भारत@2047 के संकल्प में छत्तीसगढ़ अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान देगा।









