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छत्तीसगढ़िया महासंघ की बड़ी बैठक: बाहरी लोगों को जमीन बेचने पर रोक की मांग हुई तेज

छत्तीसगढ़िया महासंघ बैठक में सामाजिक प्रतिनिधि

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छत्तीसगढ़िया महासंघ बैठक में सामाजिक प्रतिनिधि

  • बाहरी कब्जे और अतिक्रमण पर जताया कड़ा आक्रोश

  • विभिन्न समाजों के लिए बोर्ड गठन की मांग तेज

 

रायपुर।

राजधानी के गुरु घासीदास संस्कृति भवन में रविवार को छत्तीसगढ़िया महासंघ बैठक संपन्न हुई। महासंघ के अध्यक्ष रमेश यदु की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर गहन मंथन किया गया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ ईष्ट देव की पूजा-अर्चना के साथ हुआ, जिसमें प्रदेश भर से आए सामाजिक प्रतिनिधियों ने एकजुटता का संकल्प लिया। बैठक में मुख्य रूप से बालोद जिले के जमडीपाठ स्थित आदिवासी समाज के पूजा स्थल पर हुए कथित अवैध कब्जे को लेकर भारी आक्रोश देखा गया।

जमडीपाठ प्रकरण पर आर-पार की रणनीति

बैठक के दौरान जमडीपाठ और पांडेश्वर धाम से जुड़े विवादित मामलों के स्थायी समाधान के लिए महासंघ ने ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है। सर्व आदिवासी समाज के विनोद नागवंशी ने जमडीपाठ प्रकरण की विस्तृत जानकारी साझा की, जिसके बाद सर्वसम्मति से भविष्य की रणनीति तय करने हेतु एक 40 सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए प्रदेश सरकार को अब ठोस और प्रभावी पहल करनी चाहिए। उन्होंने संगठन की मजबूती पर बल देते हुए कहा कि जब तक समाज संगठित नहीं होगा, तब तक न्याय की उम्मीद बेमानी है।

बाहरी लोगों को जमीन बिक्री पर लगे रोक

महासंघ ने राज्य की अस्मिता और संसाधनों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव पारित किया। बैठक में पुरजोर मांग उठाई गई कि छत्तीसगढ़ के बाहर के व्यक्तियों को राज्य में भूमि क्रय-विक्रय करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जानी चाहिए। पूर्व सांसद नंदकुमार साय ने इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सभी समाजों को एकजुट होकर अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंकना होगा। वहीं, पूर्व आईजी अकबर राम कोर्राम ने बस्तर क्षेत्र में हो रही अंधाधुंध जंगलों की कटाई और बाहरी तत्वों द्वारा किए जा रहे अवैध कब्जों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।

बोर्ड गठन में देरी पर सरकार को घेरा

बैठक में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उपेक्षा का आरोप लगाया गया। वक्ताओं ने कहा कि गाड़ा समाज के लिए बाजा बोर्ड, अघरिया पाल समाज के लिए भेड़ एवं ऊन संवर्धन बोर्ड, कलार समाज के लिए महुआ बोर्ड तथा शाकंभरी बोर्ड का गठन अब तक नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए महासंघ के अध्यक्ष रमेश यदु ने विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों के साथ तालमेल बिठाया। बैठक को युवराज सिन्हा, उग्रसेन, शिव सारथी, गोपाल साहू, पी.आर. यदु, राजा निर्मलकर, अश्विनी बबलू त्रिवेंद्र, बोधिराम निषाद, ललित काकड़े एवं राकेश वैष्णव ने भी संबोधित किया और आदिवासी समाज के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर पूर्व विधायक जनकलाल ठाकुर, बी.एस. रावटे, दिनेश चंद्राकर, चित्रसेन प्रधान, ललित कुंडलिका, रूपेंद्र नागर, भगतराम सोनी, मनोज यादव, प्रदीप देशमुख और माधव देवदास सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी सदस्यों ने एक स्वर में सामाजिक एकता और अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

 

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