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बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान: संभाग स्तरीय कार्यशाला का हुआ सफल आयोजन

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दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।

मिशन वात्सल्य योजना के तहत ”बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान” के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु दुर्ग संभाग में एक दिवसीय संभाग स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह के सेमिनार कक्ष में आयोजित की गई, जिसमें दुर्ग संभाग आयुक्त एस.एन. राठौर, कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक नंदलाल चौधरी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।

 

बाल विवाह रोकथाम पर संभाग आयुक्त ने दिए निर्देश

कार्यशाला के दौरान दुर्ग संभाग आयुक्त एस.एन. राठौर ने अधिकारियों और नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक कुरीति है, जो व्यक्ति और समाज दोनों को प्रभावित करती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में बाल विवाह की दर 12 प्रतिशत है। इसे कम करने के लिए प्रशासन को हर स्तर पर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग और स्थानीय निकायों को समन्वय बनाकर बाल विवाह की रोकथाम के लिए कार्य करना चाहिए।

कलेक्टर ने महिलाओं को सक्षम बनाने की अपील की

कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी ने बाल विवाह के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कम उम्र में विवाह से बच्चों की शिक्षा और मानसिक विकास प्रभावित होता है। उन्होंने कहा, “महिलाओं को पहले शिक्षित और सक्षम बनाना आवश्यक है। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपनी बेटियों की शिक्षा पर ध्यान दें और उन्हें स्वावलंबी बनाएं। बेटियां जब तक सक्षम न हो जाएं, तब तक विवाह नहीं करना चाहिए।”

महिला एवं बाल विकास विभाग ने दिया प्रशिक्षण

महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक नंदलाल चौधरी ने कार्यशाला के दौरान बताया कि शासन और प्रशासन बाल विवाह की रोकथाम के लिए गंभीरता से कार्य कर रहे हैं। इसके तहत संभाग स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए समाज की सहभागिता जरूरी है। स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों को इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

युवोदय-दुर्ग की पहल की सराहना

कार्यशाला में युवोदय-दुर्ग के स्वयंसेवी दल द्वारा बाल विवाह रोकथाम के लिए किए गए जागरूकता प्रयासों की सराहना की गई। उन्होंने बाल विवाह जागरूकता अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए कार्यों की जानकारी दी।

बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान की रूपरेखा

राज्य सरकार ने अगले तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत पंचायत राज संस्थाओं, नगरीय निकायों, समाज प्रमुखों, महिला समूहों और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

अभियान की रणनीति के तहत सामाजिक जागरूकता, किशोर सशक्तिकरण और मीडिया संवेदीकरण के जरिए राज्य, जिला, विकासखंड और ग्राम स्तर तक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बाल विवाह रोकथाम अधिनियम 2006 के प्रावधानों को लोगों तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

बाल विवाह रोकथाम के लिए शपथ

कार्यशाला के अंत में बाल विवाह रोकथाम की शपथ दिलाई गई। इसमें सभी अधिकारियों और नागरिकों ने संकल्प लिया कि वे अपने परिवार में कभी भी बाल विवाह नहीं होने देंगे और समाज में बाल विवाह की बुराई का विरोध करेंगे। उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि वे आमजनों को इस सामाजिक बुराई के प्रति जागरूक करेंगे।

इस कार्यशाला का संचालन महिला एवं बाल विकास विभाग दुर्ग के जिला कार्यक्रम अधिकारी आर.के. जाम्बुलकर के नेतृत्व में किया गया। कार्यशाला में पुलिस विभाग, जिला पंचायत, स्वास्थ्य विभाग, आदिवासी विकास विभाग और श्रम विभाग के अधिकारी व अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

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