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राजपरिवार के शौर्यप्रताप सिंह जूदेव की अगुवाई में हुआ ऐतिहासिक वैदिक अनुष्ठान।
जशपुरनगर।
श्रावण मास की पावन नाग पंचमी के अवसर पर जशपुर की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक धरोहर पक्कीदाड़ी शिव मंदिर में परंपरानुसार भव्य रुद्राभिषेक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक आस्था का पर्व नहीं था, बल्कि जशपुर की सदियों पुरानी सांस्कृतिक चेतना और विरासत का भी जीवंत प्रमाण बना।
राजपरिवार की अगुवाई में ऐतिहासिक अनुष्ठान
अनुष्ठान की अगुवाई स्वयं राजपरिवार के शौर्यप्रताप सिंह जूदेव ने की। उनके साथ राजपुरोहितों और राजपंडितों की विशेष उपस्थिति रही, जिन्होंने वेदमंत्रों के उद्घोष के बीच पारंपरिक वैदिक विधियों से भगवान शिव का रुद्राभिषेक संपन्न कराया। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहे और भक्ति, शांति व आस्था के इस दुर्लभ संगम का हिस्सा बने।
धरोहर जो जोड़ती है पीढ़ियों को
पक्कीदाड़ी शिव मंदिर महज एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि जशपुर रियासत की जीवंत परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक है। सदियों से यहां नाग पंचमी के दिन विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठानों की परंपरा चली आ रही है। वर्तमान में भी राजपरिवार इस धरोहर को सहेजने में जुटा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए गौरव और प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
‘संस्कृति ही हमारी असली पहचान’: शौर्यप्रताप
इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष जशपुर शौर्यप्रताप सिंह जूदेव ने नगर के आमजनों को स्पष्ट संदेश दिया कि सांस्कृतिक विरासत केवल अतीत की बात नहीं, बल्कि वर्तमान की जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रुद्राभिषेक जैसे आयोजन परंपरा, धर्म और समाज के बीच एक सुंदर सेतु का निर्माण करते हैं, जिससे हमारी जड़ों से जुड़ाव बना रहता है।
भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर
पूरे दिन पक्कीदाड़ी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। रुद्राभिषेक के उपरांत नाग देवता की विशेष आरती की गई, जिसके बाद भक्तों को श्रद्धापूर्वक प्रसाद वितरित किया गया। मंदिर का वातावरण शंखनाद, घंटध्वनि और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से लगातार गुंजायमान रहा, जो वहां उपस्थित हर व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रहा था।









