सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की निर्वासन नीति को दी हरी झंडी
OM Darpan
प्रवासियों को तीसरे देशों में भेजने की वैधता पर सुनवाई करेगा अमेरिका का शीर्ष न्यायालय
वॉशिंगटन। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को प्रवासियों को उनके मूल देश के बजाय तीसरे देशों में भेजने की विवादास्पद नीति को फिलहाल जारी रखने की अनुमति दे दी है। न्यायालय इस मामले की कानूनी वैधता पर विस्तृत विचार कर रहा है कि क्या प्रवासियों को ऐसे देशों में भेजने से पहले अपनी आपत्ति दर्ज कराने का उचित अवसर मिलना चाहिए जिनसे उनका कोई पूर्व संबंध नहीं है।
निचली अदालत के फैसले पर लगी रोक
शीर्ष न्यायालय के इस आदेश से निचली अदालत का वह फैसला फिलहाल रुक गया है जिसके कारण निर्वासन प्रक्रिया बाधित हो रही थी। संघीय सरकार के वकीलों ने दलील दी कि निचली अदालत के हस्तक्षेप की वजह से करीब 70 प्रवासियों को तीन देशों में ले जाने वाली एक निर्वासन उड़ान को रद्द करना पड़ा था। ट्रंप प्रशासन की इस प्रमुख नीति के तहत अब तक करीब दो दर्जन से अधिक देशों में 25 हजार लोगों को भेजा जा चुका है।
गोपनीय समझौतों के तहत हुई कार्रवाई
अदालती दस्तावेजों के अनुसार ट्रंप प्रशासन ने कई देशों के साथ गोपनीय समझौतों के तहत लोगों को तीसरे देशों में भेजा है जिनमें लाइबेरिया और गुयाना जैसे देश शामिल हैं, हालांकि अधिकांश प्रवासियों को मैक्सिको भेजा गया है। प्रशासन का तर्क है कि जिन लोगों के खिलाफ निर्वासन का अंतिम आदेश है और जिनका अपना देश उन्हें वापस लेने से मना कर देता है उन्हें ही तीसरे देशों में भेजा जाता है। इसमें आपराधिक दोषसिद्धि वाले लोग भी शामिल हैं।
सुरक्षा और प्रताड़ना पर उठे सवाल
संघीय वकीलों ने दावा किया कि तीसरे देशों की सरकारें प्रवासियों को प्रताड़ित न करने का भरोसा दिलाती हैं लेकिन प्रवासियों के वकीलों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार कई प्रवासी उन देशों की जेलों में पहुंच गए जिनके बारे में उन्होंने पहले कभी नहीं सुना था। सुरक्षा जोखिम के कारण उनके पास अंततः उन्हीं देशों में लौटने का विकल्प बचा जहां से वे जान बचाकर भागे थे। यह कार्रवाई अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लाखों लोगों को बाहर निकालने के ट्रंप प्रशासन के अभियान का हिस्सा है।
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